
सर्दी-जुकाम और जीवनशैली में बदलाव से माइग्रेन से पीड़ित लोगों में इसकी आवृत्ति और तीव्रता बढ़ जाती है। जागरूकता और कुछ सरल निवारक उपायों से ठंड के महीनों में माइग्रेन के हमलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सर्दी का मौसम माइग्रेन पीड़ितों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यथार्थ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और ग्रुप डायरेक्टर – न्यूरोलॉजी, डॉ. कुणाल बहरानी कहते हैं, “कई मरीज़ों को लगता है कि ठंड के महीनों में उनका सिरदर्द तेज़ या बार-बार होने लगता है। ठंडे तापमान के कारण खोपड़ी और गर्दन की रक्त वाहिकाएं तेज़ी से सिकुड़ जाती हैं, जिससे ट्राइजेमिनल तंत्रिका मार्ग में जलन हो सकती है। ठंडी हवा के थोड़े से संपर्क में आने से भी माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को दौरा पड़ सकता है।”




