आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई: जेल की कोठरी से ईरान के सर्वोच्च नेता तक का सफ़र
इजराइल को पश्चिम एशियाई क्षेत्र का 'कैंसरग्रस्त ट्यूमर' बताते रहे हैं

आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई का जन्म 1939 में ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में हुआ, जिसे देश का सबसे पवित्र शहर माना जाता है. अपने पिता की तरह उन्होंने भी मौलवी बनने की राह चुनी और शिया मुसलमानों के दो प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में से एक, क़ुम में जाकर धार्मिक शिक्षा प्राप्त की. महज़ 11 साल की उम्र में वह मौलवी बन गए थे.
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई एक बार नहीं बल्कि अलग-अलग मौकों पर कई बार ये ज़ाहिर कर चुके हैं कि इसराइल को लेकर उनके इरादे क्या हैं.
ख़ामेनेई खुलकर इसराइल के अस्तित्व को मिटाने की बात करते रहे हैं. वो लंबे समय से इसराइल को पश्चिम एशियाई क्षेत्र का एक ऐसा ‘कैंसरग्रस्त ट्यूमर’ बताते रहे हैं, जिसे उखाड़ फेंकना ज़रूरी है और उनके मुताबिक़ ये होकर रहेगा.
लेकिन ये शायद पहली बार है जब इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ख़ामेनेई को निशाने पर लिए जाने से जुड़ी कोई बात सीधे और सार्वजनिक तौर पर कही हो.

