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SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई; बंगाल में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की डेडलाइन एक हफ्ते बढ़ाई, DGP से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वह इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह बात सभी राज्यों के लिए है। जरूरत पड़ने पर आदेश जारी किए जाएंगे। साथ ही कोर्ट ने बंगाल SIR की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की तारीख 14 फरवरी से बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी है।

वहीं चुनाव आयोग (EC) ने कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ बदमाशों ने बंगाल में SIR से जुड़े नोटिस जला दिए और अब तक इस मामले में कोई FIR नहीं हुई। कोर्ट ने बंगाल के DGP से जवाब मांगा है। DGP से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।

4 फरवरी को हुई सुनवाई में सीएम बनर्जी ने अदालत में दलीलें पेश की थीं। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर सीएम के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं।

वेस्ट बंगाल सरकार को मंगलवार शाम 5 बजे तक उन 8,505 अफसरों की लिस्ट जमा करने का निर्देश दिया, जिन्हें वह तैनात करने का प्रस्ताव दे रही है। चुनाव आयोग को EROs और AEROs को बदलने और जरूरत पड़ने पर इन अधिकारियों की सर्विस लेने का अधिकार दिया गया।

बाकी अधिकारियों में से ECI उनके बायोडेटा की जांच के बाद, पहले से लगे माइक्रो-ऑब्जर्वर की संख्या के बराबर लोगों को शॉर्टलिस्ट कर सकता है और उन्हें EROs, AEROs और माइक्रो-ऑब्जर्वर की मदद करने के लिए थोड़ी ट्रेनिंग दे सकता है। ये अधिकारी सिर्फ प्रोसेस में मदद करेंगे और आखिरी फैसला सिर्फ EROs का होगा।

 

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