यदि ICC एक्शन न ले या समिति ही न हो, तो कैसे लें दोषियों के खिलाफ एक्शन

आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। लेकिन, सफलता के इस सफर में कार्यस्थल (Workplace) की सुरक्षा और सम्मान सबसे अहम है। भारत में सरकारी हो या प्राइवेट, हर संस्थान के लिए यह अनिवार्य है कि वहां लिंग आधारित भेदभाव न हो। समानता आपका मौलिक अधिकार है, और इसे सुनिश्चित करने के लिए विशाखा गाइडलाइंस व पॉश एक्ट (POSH Act) जैसे कड़े कानून मौजूद हैं।
आंतरिक शिकायत समिति (ICC): आपकी सुरक्षा का ढाल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जिस भी सरकारी या निजी संस्थान में 10 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, वहां आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaint Committee) का गठन अनिवार्य है।
समिति की बनावट: इसकी अध्यक्ष अनिवार्य रूप से एक महिला ही होती है। निष्पक्षता के लिए इसमें एक एनजीओ (NGO) प्रतिनिधि भी शामिल किया जाता है।
मुख्य उद्देश्य: ऑफिस को यौन उत्पीड़न और भेदभाव से मुक्त रखना।
कब और किन स्थितियों में दर्ज कराएं शिकायत?
अगर कार्यस्थल पर आपके साथ नीचे दी गई कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो आप बिना डरे ICC में शिकायत कर सकती हैं,
अवांछित शारीरिक संपर्क या स्पर्श।
सेक्शुअल फेवर की मांग करना।
अश्लील टिप्पणियां या गलत इशारे करना।
पोर्नोग्राफी दिखाना या आपत्तिजनक व्यवहार।
यदि ICC एक्शन न ले या समिति ही न हो, तो क्या करें?
अक्सर महिलाएं डर या हिचकिचाहट में चुप रह जाती हैं, लेकिन कानून आपकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यदि ऑफिस में सुनवाई न हो, तो इन विकल्पों को चुनें…
पुलिस रिपोर्ट: अगर आंतरिक समिति सही से जांच न करे, तो आप सीधे पुलिस में एफआईआर दर्ज करा सकती हैं।
एलसीसी (LCC): यदि आपके ऑफिस में समिति नहीं है, तो जिला कलेक्टर के अधीन आने वाली स्थानीय शिकायत समिति (LCC) में जाएं।
ऑनलाइन पोर्टल: अपनी शिकायत को pgportal.gov.in या She-Box पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करें।
न्यायालय: सभी रास्ते बंद होने पर आप उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकती हैं।





