राष्ट्र आजकल/ संतोष सिंह राठौर/ डिंडोरी / वैसे तो शराब पर दिखावे के लिए बंदिश लगाई गई है जिसके कारण औपचारिकता के लिए अवैध शराब बिक्री करने वाले विक्रेताओं को जानकारी देकर विभाग के द्वारा औपचारिकता के लिए कार्यवाही किए जाने के मामले सामने आते ही रहते है जिसे समाचार पत्रों एवं सोसल मीडिया के माध्यम से अनेक बार संज्ञान में भी लाए गए, अवैध शराब बिक्री की जानकारी दिए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा उक्त स्थल पर कार्यवाही के नाम पर औपचारिकता तो की जाती है पर शिकायतकर्ता का भी नाम, अवैध शराब बिक्री करने वाले को बता दिया जाता है जिस से आम जनता रुचि नहीं ले रहे फिर चाहे जो भी जैसा भी चले उसे नजरअंदाज करना उसकी मजबूरी हो जाती है शासन के द्वारा एक तरफ शराब पर पाबंदी करने अभियान भी चलाए जाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ शराब की बिक्री भी करने ठेके चलाए जा रहे हैं नर्मदा जी के 5 किलोमीटर तक के दायरे में शराब ठेके निरस्त कर दिए गए थे ताकि नर्मदा खंड में साफ स्वच्छ माहौल बना रहे बावजूद इसके मुख्यालय समेत मां नर्मदा से 5 किलोमीटर के दायरे में अनगिनत शराब दुकाने अवैध रूप से चलाई जा रही हैं जिसे बल्कि यूं कहा जा सकता है कि जब ठेके में शराब बेची जा रही थी तब जिला मुख्यालय में एक ही दुकान था पर जिला मुख्यालय में ठेका निरस्त कर दिया गया है जिससे जिला मुख्यालय में अनेक अवैध शराब की दुकानें संचालित हो रही है जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण अंचलों में पान ठेला किराना सभी होटल इस तरह से हजारों दुकानो पर अन्य सामग्रियों की आड़ में अवैध शराब बिक्री किए जा रहे हैं
जानकारी के बावजूद ,विभाग नहीं कर रही कार्यवाही
विभाग के द्वारा जानकारी के बावजूद अवैध शराब बिक्री पर उचित कार्यवाही ना किए जाने पर आज ,गली मोहल्ले में अवैध शराब बिक्री धड़ल्ले से चल रहा है जिसकी मुख्य वजह प्रशासन की कार्यवाही का ना किया जाना है अब लोगों की मानसिकता ही ऐसी हो गई है कि कुछ अन्य सामान दुकान पर रखकर शराब का बिक्रय ही किया जाए जिससे आसानी से उनको उनकी मजदूरी प्राप्त हो जाएगी चुकी विभाग को इससे कोई लेना-देना नहीं है कि आप क्या बिक्री कर रहे हो उन्हें तो बस कार्यवाही के नाम पर औपचारिकता करते हुए खानापूर्ति करना है
नशे के अधीन हो रहा युवा वर्ग
जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण अंचलों में मादक पदार्थ बड़ी आसानी से मिल जाने के कारण समाज एवं युवा वर्ग इस कदर नशे में डूबता जा रहा है कि उसे कौन छोटा है कौन बड़ा है इसका लिहाज ही नहीं रहा अब वह दिन दूर नहीं जब युवा पीढ़ी को लोग अंधकार का जन्मदाता कहेंगे क्योंकि वह स्थिति स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है पहले बड़े बुजुर्ग युवाओं को देश का भविष्य कहा करते थे पर आज युवा मादक पदार्थों के इतने अधीन हो गए हैं जिन्हें अब यह होश भी नहीं रहा कि बड़े बुजुर्ग होते क्या हैं
मादक पदार्थों में प्रतिबंध आवश्यक
मादक पदार्थ पर शासन के द्वारा प्रतिबंध लगाने खरीदने और बेचने वालों पर कार्यवाही के लिए अनेक कानून बनाए गए हैं पर वह कानून अब बोनी नजर आ रहे हैं चूंकि विभाग 100 में 1 पर कार्यवाही कर औपचारिकता पूरी कर रहा है जबकि मादक पदार्थ माफिया बेखौफ जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण अंचलों में दुकानों एवं होटलों में शराब बिक्री करते नजर आते हैं हैरानी की बात तो यह है कि जानकारी के बाद भी विभागीय अमले के द्वारा उन पर कार्यवाही नहीं की जाती है साल 6 महीने में मात्र औपचारिकता के लिए एक वाहन समेत कुछ पेटी में शराब जप्त कर ली जाती है जिसे विभाग के द्वारा बड़ी कार्यवाही बताई जाती है इस तरह के दिखावे जब तक चलते रहेंगे शराब माफिया या अन्य मादक पदार्थ माफिया बेखौफ अपने कार्य को अंजाम देते रहेंगे।