पूरे देश में एक ही पासवर्ड से चलेगा पब्लिक वाई-फाई; अब बार-बार ओटीपी से मिलेगी राहत

सरकार पीएम-वाणी की विफलता से सबक लेते हुए एक नया और उन्नत पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाना है।
अब यूजर्स को हर हॉटस्पॉट के लिए अलग ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। देशभर में फैले 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही ओटीपी या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने इसका परामर्श-पत्र जारी करके लोगों से सुझाव मंगाए हैं।
सार्वजनिक वाई-फाई को सुरक्षित बनाने के लिए ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3’ जैसे मानक लागू होंगे। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षित यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर मिलेगा।
कमाई का मॉडल बनाना मकसद
पेपर के अनुसार, मौजूदा वाई फाई सिस्टम इसलिए नहीं चला क्योंकि यह यूजर की जरूरत नहीं बन पाया। साथ ही ऑपरेटर की कमाई नहीं बनी। इसलिए सरकार प्रस्तावित वाईफाई सिस्टम को ऑपरेटर के लिए कमाई का मॉडल बनाना चाहती है।
इसके लिए विज्ञापन-आधारित मॉडल, पेड प्लान व सब्सिडी (वायबिलिटी गैप फंडिंग) जैसे विकल्प दिए जाएंगे।
‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा
शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट और गांवों में कम लागत वाला ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा। देश की 140 करोड़ की आबादी में अभी महज 2% लोग पब्लिक वाई-फाई उपयोग करते हैं।
दक्षिण कोरिया में 80%, अमेरिका में 70%, यूरोप-चीन में 60% व इंग्लैंड में 50% आबादी पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करती है।
ट्राई द्वारा प्रस्तावित यह नया ढांचा न सिर्फ इंटरनेट की पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते डेटा के दबाव को भी कम करेगा।
सस्ते इंटरनेट से डिजिटल इंफ्रा मजबूत होगा
बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक यह न केवल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराकर डिजिटल इंफ्रा को भी मजबूत करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो महंगे डेटा प्लान नहीं ले सकते।
उन्होंने कहा कि वाई-फाई हाई-डेटा उपयोग जैसे वीडियो, क्लाउड और एआई आधारित सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करता है। ई-गवर्नेंस जैसी सेवाओं तक पहुंच के लिए भी ये आवश्यक है।





