स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला-सेक्युलरिज्म के लिए यूनिफॉर्म जरूरी
नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सोमवार को कहा स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम का पालन करना जरूरी है। इससे बच्चों में बराबरी की भावना रहती है। स्कूल की अपनी पहचान भी बनती है।
हाईकोर्ट ने कहा, यूनिफॉर्म की बदौलत बिना किसी धार्मिक भेदभाव वाला माहौल बना रहता है। इसलिए कोई भी छात्र या छात्रा स्कूल के तय किए गए ड्रेस कोड को बदलने की जिद नहीं कर सकती।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने इसके साथ ही नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी। इसमें स्कूल के तय ड्रेस कोड के साथ हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी गई थी।
स्कूलों में हिजाब विवाद कर्नाटक से शुरू हुआ
कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी 2022 में उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ। कुछ मुस्लिम छात्राओं ने हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की मांग की, जबकि कॉलेज प्रशासन ने इसे यूनिफॉर्म नियम के खिलाफ बताया। इसके बाद विरोध दूसरे कॉलेजों तक पहुंचा और कुछ जगह भगवा शॉल पहनकर जवाबी प्रदर्शन हुए।
15 मार्च 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्राओं की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और स्कूल के तय ड्रेस कोड का पालन कराया जा सकता है।
हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी पेंडिंग
हिजाब विवाद पर 13 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच का फैसला एकमत नहीं था। दोनों जजों की राय अलग रही।
जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। उनके मुताबिक स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होता है और हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित नहीं किया गया।




