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डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया; मोबाइल, सोना, तेल, विदेशी सामान खरीदना महंगा

भारतीय रुपए की कीमत में आज यानी 30 मार्च को सबसे बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 88 पैसे कमजोर होकर 95.58 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल की वजह से रुपए में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है।

इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा। मोबाइल, सोना-चांदी समेत विदेशों से इम्पोर्ट होने वाला सामान खरीदना महंगा होगा।

एक महीने में रुपया करीब 4% गिरा, जबकि FY 2025-26 में 11% से ज्यादा टूट चुका है। यह पिछले 14 साल की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक, ईरान युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है।

हालांकि, रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के फॉरेक्स पोजीशन लिमिट को 100 कर रुपए को संभालने की कोशिश की, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते बाजार में इसका असर बहुत कम समय के लिए दिखा।

रुपए की गिरावट के असर को 9 सवाल-जवाब में समझें…

सवाल 1: रुपए में इस ऐतिहासिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?

जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थी। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।

सवाल 2: विदेशी निवेशकों (FIIs) का इसमें क्या रोल है?

जवाब: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 12.3 अरब डॉलर (करीब 1.15 लाख करोड़ रुपए) निकाल लिए हैं। ग्लोबल अनिश्चितता और युद्ध के डर से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं। इतनी भारी बिकवाली से रुपए पर दबाव बहुत बढ़ गया है।

सवाल 3: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के तनाव का रुपए से क्या लेना-देना है?

जवाब: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% और भारत का लगभग आधा तेल गुजरता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रूट पर सप्लाई बाधित होने का डर है। मार्केट के जानकारों का कहना है कि जब तक इस समुद्री रास्ते पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक रुपए में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

 

 

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