गैस की परेशानी के बीच इंडक्शन क्या एक सुरक्षित विकल्प है?

अंचल में जारी एलपीजी संकट और सिलिंडरों की किल्लत ने शहरवासियों को इलेक्ट्रिक मोड पर ला दिया है। घरों में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल उपभोक्ताओं के मन में कौंध रहा है कि इंडक्शन कितनी बिजली खाता है और इससे महीने का बिल कितना बढ़ेगा?
गैस की अनिश्चितता के बीच इंडक्शन एक सुरक्षित विकल्प तो है, लेकिन बिना सोचे-समझे किया गया इसका उपयोग आपके बिजली बिल को ‘करंट’ लगा सकता है। बिजली दरों के अनुसार, यदि आप दिन भर में दो घंटे इंडक्शन चलाते हैं, तो महीने भर में आपके बिल में 500 से 800 तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए गैस और इंडक्शन का संतुलित उपयोग ही समझदारी है।
वॉट का खेल : जितना दमदार इंडक्शन, उतनी ज्यादा खपत
बाजार में उपलब्ध इंडक्शन अपनी क्षमता के आधार पर बिजली की खपत करते हैं। ग्वालियर सहित प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक यूनिट बिजली के लिए अधिकतम 6.79 से 8.98 रुपये पड़ती है।
ऐसे बचाएं बिजली : स्मार्ट कुकिंग से कम होगा बिल
इंडक्शन का उपयोग करते समय यदि आप इन पांच बातों का ध्यान रखेंगे, तो बिल में 30 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है।
सही बर्तनों का चुनाव : इंडक्शन के लिए हमेशा फ्लैट बाटम (समतल तल) वाले चुंबकीय बर्तनों का ही उपयोग करें। बर्तन जितना सटीक फिट होगा, ऊर्जा की बर्बादी उतनी ही कम होगी।
ढककर पकाएं : खाना पकाते समय बर्तन को ढक्कन से ढक दें। इससे खाना जल्दी पकेगा और इंडक्शन का इस्तेमाल कम समय के लिए करना होगा।
सब्जी काटने के बाद चालू करें : अक्सर लोग इंडक्शन चालू करने के बाद सब्जियां काटते हैं। इससे काफी बिजली बर्बाद होती है। पूरी तैयारी के बाद ही बटन आन करें।
पावर ऑफ का सही समय : खाना पूरी तरह पकने से एक-दो मिनट पहले इंडक्शन बंद कर दें। ग्लास टाप की गर्मी से खाना अपने आप फाइनल कुक हो जाएगा।





