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गलती से टूट जाए नवरात्र का व्रत? घबराएं नहीं, इन ‘महाउपायों’ से दूर करें दोष

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) का आज तीसरा दिन है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की उपासना में लीन हैं। शक्ति की आराधना के इन नौ दिनों में उपवास का विशेष महत्व है, लेकिन कई बार सेहत बिगड़ने या अनजाने में हुई चूक के कारण व्रत खंडित हो जाता है। ऐसे में भक्त अक्सर डर और ग्लानि महसूस करने लगते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, यदि भक्ति भाव सच्चा हो तो अनजाने में हुई भूल के लिए प्रायश्चित का विधान है। आइए जानते हैं व्रत टूटने पर दोष निवारण के प्रभावी उपाय

1. क्षमा याचना और मंत्र जप

जैसे ही आपको अपनी भूल का आभास हो, सबसे पहले शुद्ध जल से आचमन करें (हाथ-मुंह धोएं)।

मंदिर के सामने बैठकर मां दुर्गा से हाथ जोड़कर अपनी गलती के लिए क्षमा मांगें।

‘अच्युत-अनंत-गोविंद’ नाम का 108 बार जप करें।

इसके साथ ही ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का एक माला (108 बार) जाप करने से मानसिक अशुद्धि दूर होती है और व्रत का दोष कम होता है।

2. छोटा हवन और गंगाजल का प्रयोग

अगर आपसे बड़ी चूक हुई है, तो घर में ही एक छोटा सा हवन अनुष्ठान करें।

आम की लकड़ियों पर कपूर, घी और हवन सामग्री से मां के नाम की आहुतियां दें।

हवन के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इससे वातावरण की नकारात्मकता समाप्त होती है और आपका व्रत पुनः ‘संकल्पित’ माना जाता है।

3. दान-पुण्य और कन्या पूजन

शास्त्रों में दान को सबसे बड़ा प्रायश्चित बताया गया है।

सफेद वस्तुओं का दान – अपनी क्षमतानुसार दूध, चीनी, चावल या सफेद वस्त्रों का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को करें।

कन्या पूजन – दोष निवारण के लिए उसी दिन या अगले दिन दो छोटी कन्याओं को आदरपूर्वक भोजन कराएं। उन्हें फल या दक्षिणा देकर विदा करें, क्योंकि कन्याएं साक्षात मां दुर्गा का स्वरूप मानी जाती हैं।

 

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