MP में अब बनेंगी एकीकृत टाउनशिप, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति भी शहरों के आसपास लैंड पुलिंग के जरिये भूमि लेकर टाउनशिप बना सकेंगे

मध्य प्रदेश में अब एकीकृत टाउनशिप बनेंगी। किसान, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति भी शहरों के आसपास लैंड पुलिंग के जरिये भूमि लेकर टाउनशिप बना सकेंगे। परियोजना के 15 प्रतिशत भू-भाग पर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और एलआइजी श्रेणी के आवास बनाने होंगे।
किफायती आवास बनाने पर अलग से अनुदान मिलेगा। विकासकर्ता को नगर तथा ग्राम निवेश में पंजीयन कराना होगा। ग्रीन बेल्ट जैसी पांबदियों से छूट मिलेगी। परियोजना के बीच सरकारी भूमि आने पर आठ हेक्टेयर तक छूट दी जा सकेगी।
नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने बुधवार को नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं। प्रदेश में शहरीकरण को लेकर बढ़ते दबाव और बेतरतीब विकास को व्यवस्थित करने के लिए सरकार अब एकीकृत टाउनशिप को बढ़ावा देगी। इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं, जो विकास प्राधिकरण सहित अन्य हाउसिंग एजेंसियों पर भी लागू होंगे।
कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा
अभी तक टाउनशिप का विकास कालोनाइजरों तक सीमित था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा। इन पर कालोनाइजर एक्ट के प्रविधान लागू होंगे। नागरिकों को पेयजल, बिजली, सड़क, नाली सहित सभी सुविधाएं देनी होंगी।
निजी भूमि का आपसी सहमति से होगा अधिग्रहण
टाउनशिप विकसित करने के लिए यदि भूमि कम पड़ती है और वहां सरकारी भूमि उपलब्ध है तो वह आठ हेक्टेयर की सीमा में उपलब्ध कराई जा सकेगी। बीच में यदि निजी भूमि आती है तो विकासकर्ता सरकार से अनुरोध कर आपसी सहमति के आधार पर अधिग्रहण करा सकेंगे।
टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा
निर्धारित शुल्क चुकाकर उन्हें पंजीयन भी कराना होगा। टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा। प्रत्येक चरण के लिए तीन वर्ष रखे जाएंगे। दूसरे चरण का काम तभी प्रारंभ किया जा सकेगा, जब पहले चरण का काम कम से कम 50 प्रतिशत पूरा हो जाए।
पांच लाख से कम आबादी क्षेत्र के लिए दस हेक्टेयर भूमि
नियम में स्पष्ट किया गया है कि पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के आसपास टाउनशिप के लिए कम से कम दस हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए यह 20 हेक्टेयर रहेगी। मार्ग चौड़ाई 24.0 मीटर से कम न हो।
मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी
40 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र वाले टाउनशिप में मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टाउनशिप के विकास की अनुमति राज्य स्तर से लेनी होगी।
इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में साधिकार समिति रहेगी। बाकी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति देगी। आवेदन करने पर 60 दिन के अंदर अनुमति देनी होगी।
यहां लागू नहीं होंगे नियम
वन, जल निकाय जैसे नदी, नाला, जलाशय, बांध, अधिसूचित राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्यजीव अभयारण्य, रक्षा संपदा, छावनी बोर्ड, ईको संवेदनशील क्षेत्र, खनन क्षेत्र, विशेष आर्थिक क्षेत्र, वन्यजीव गलियारा, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों से प्रभावित क्षेत्र, रेलवे भूमि और सरकार द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र।
इसी तरह 20-40 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए नेटवर्थ 10 करोड़ और टर्नओवर 12 करोड़, 40-100 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए नेटवर्थ 20 करोड़ और टर्नओवर 20 करोड़, 100-300 हेक्टेयर के लिए नेटवर्थ 50 करोड़ और टर्नओवर 40 करोड़ और 300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करने के लिए न्यूनतम नेटवर्थ 250 करोड़ और औसत वार्षिक टर्नओवर 200 करोड़ रुपये होना चाहिए।





