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मध्यप्रदेश

नदी में मिल रहा नालों का पानी ..तीर्थनगर ओंकारेश्वर में मैली हो रही मां नर्मदा

देश के बारह ज्योतिर्लिंग में शामिल ओंकारेश्वर में मां नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। यहां नालों का पानी नदी में मिल रहा है। नर्मदा में स्नान और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शनार्थ देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन घाटों पर गंदगी और गंदे पानी की वजह से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है। वहीं ओंकारेश्वर की छवि भी धूमिल हो रही है।

सिंहस्थ-2028 को लेकर तीर्थनगरी में अरबों रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन यहां बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा गंदे पानी के उपचार के लिए एमपीयूडीसी को जिम्मेदार ठहरा कर दायित्वों की इतिश्री कर ली जाती है। तीर्थ नगरी में नर्मदा की बदहाली को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी वीडियो बहुत प्रसारित हो रहे हैं।

ओंकारेश्वर में पुण्य सलिला मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हालातों में बदलाव नहीं हो रहा है। नर्मदा क्षेत्र में नालों के माध्यम से लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन द्वारा पानी उपचार के बाद छोड़ने का दावा किया जाता है। वहीं स्थानीय लोग इसे खानापूर्ति बता रहे हैं।

ओंकार मठ में मिल रहा गंदा पानी

समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमी प्रदीप ठाकुर ने बताया कि ओंकार मठ घाट पर बना वाटर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है। इसकी क्षमता प्रतिदिन ढाई लाख लीटर पानी शुद्ध करने की है। ऐसे में कई क्षेत्रों का गंदा पानी अब सीधा नाली के माध्यम से ओंकार मठ घाट पर मिल रहा है।

यह ओंकार पर्वत परिक्रमा का रास्ता भी है। घाट पर भी नाली का पानी फैलता रहता है। शिवपुरी क्षेत्र में चार से पांच स्थानों से बस्ती का पानी सीधे नर्मदा नदी में जाता है। इस ओर नगर परिषद ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगाए हैं।

कांग्रेस ने भी लगाए थे आरोप

ओंकारेश्वर में नर्मदा प्रदूषित होने से स्थानीय लोगों के साथ ही हाल ही में कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने घाटों का जायजा लेकर नर्मदा में गंदा पानी मिलने के आरोप लगाए थे। कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने ओंकारेश्वर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता अनुरूप नहीं होने और कई बंद होने के आरोप लगाए थे। इससे नर्मदा नदी में होटल और घरों के शौचालय का गंदा पानी मिल रहा है, जो प्रशासन की नाकामी और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ है।

दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद

ओंकारेश्वर में पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बाद भी नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। नगर का गंदा पानी आठ नालों के माध्यम से नर्मदा में मिल रहा है। ओंकारेश्वर में चार स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए गए, लेकिन आरोप है कि इसमें भी तीन प्लांट चल रहे है, दो बंद हैं, जिससे लाखों लीटर गंदा पानी प्रतिदिन नर्मदा में मिल रहा है।

ट्रीटमेंट प्लांट चालू होने का दावा

ओंकारेश्वर में एमपीयूडीसी द्वारा संचालित एसटीपी की क्षमता और क्रियाशीलता को लेकर हमेशा आरोप लगते रहे हैं। एमपीयूडीसी के वरिष्ठ अधिकारी ट्रीटमेंट प्लान सही ढंग से काम करने के दावे करने के साथ ही इनकी कार्य क्षमता बढ़ाने का आश्वासन देखकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

एसटीपी से उपचारित पानी के मापदंड

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञ के अनुसार गंदे नाले के पानी पर एसटीपी लगने के बाद उपचारित पानी के लिए मापदंड निर्धारित हैं, जो इस प्रकार हैं

एसटीपी से उपचारित पानी का बीओडी 10 मिलीग्राम प्रति लीटर आना चाहिए। जो वर्तमान में नाले से सीधे नर्मदा में मिल रहे पानी में 40 से 50 मिलीग्राम प्रति लीटर तक आ रहा है

उपचारित पानी में सीओडी 50 मिलीग्राम प्रति लीटर आना चाहिए, जो नर्मदा में मिल रहे पानी में 150 से 200 तक आ रहा है।

प्लांट से उपचारित पानी में सस्पेंडेड सालिड 10 मिलीग्राम प्रति लीटर तक आनी चाहिए, जो कि 100 से 150 मिलीग्राम प्रति लीटर तक आ रही है।

नर्मदा किनारे के निकायों को दिए नोटिस

मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि इंदौर संभाग अंतर्गत नर्मदा नदी किनारे स्थित स्थानीय निकायों को प्रदूषण के मामले में कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। बोर्ड द्वारा इन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है ।

विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

मां नर्मदा को गंदगी से मुक्त करने को लेकर मांधाता विधायक नारायण पटेल ने विधानसभा बजट सत्र में प्रश्न लगाया है। इसमें ओंकारेश्वर में चल रहे एसटीपी और गंदे पानी को नर्मदा में मिलने से रोकने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी संबंधित विभाग से मांगी है।

मातृ रक्षा सेवा संगठन कर रहा नर्मदा की सफाई

ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं द्वारा फेंके जा रहे वस्त्र व गंदगी को मातृ रक्षा सेवा संगठन के रंजीत वर्मा और उनकी टीम हमेशा सफाई कर हटाते हैं। संस्था समय-समय पर लोगों को जागरूक करने का काम भी कर रही है।

मानिटरिंग के लिए दो अधिकारियों को जिम्मेदारी

एमपीयूडीसी भोपाल के चीफ इंजीनियर शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि विभाग की ओर से ओंकारेश्वर क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट की मानिटरिंग के लिए दो अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नालियों का पानी सीधे नर्मदा में मिलने के विषय को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में अलग स्तर पर चर्चा की जा चुकी है।

शीघ्र ही कार्य योजना तैयार कर अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही संबंधित ठेकेदार को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य अथवा अन्य व्यवस्थाओं में यदि किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो उसका तुरंत निराकरण किया जाए और कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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