Ramadan 2026: डायबिटीज के मरीज कैसे रखें रोजा? सेहत के लिए ध्यान रखें यह जरूरी बातें

रमजान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। जहाँ यह महीना इबादत और संयम का संदेश देता है, वहीं डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए लंबे समय तक भूखा रहना एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
एक्पर्ट्स के अनुसार, खान-पान के समय में बदलाव और शरीर में पानी की कमी से ब्लड शुगर लेवल बिगड़ने का खतरा रहता है। यदि आप मधुमेह के मरीज हैं और रोजा रखना चाहते हैं, तो सुरक्षित इबादत के लिए इन डॉक्टरी परामर्शों का पालन करना अनिवार्य है।
1. डॉक्टर की सलाह के बिना न शुरू करें रोजा
रोजा रखने से कम से कम एक सप्ताह पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
दवाओं का तालमेल – डॉक्टर आपकी शुगर की स्थिति को देखते हुए इंसुलिन या दवाओं की खुराक और समय (Dosage & Timing) में बदलाव कर सकते हैं।
चेतावनी – खुद से दवाओं की डोज घटाना या बढ़ाना जानलेवा हो सकता है।
2. सेहरी – एनर्जी के लिए ‘स्लो रिलीज’ डाइट लें
सेहरी डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मील है। इसे छोड़ने की गलती कभी न करें।
क्या खाएं – ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस या मल्टीग्रेन रोटी जैसे ‘कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट’ को प्राथमिकता दें। ये धीरे-धीरे पचते हैं और दिनभर शरीर को ग्लूकोज देते रहते हैं।
प्रोटीन की शक्ति – लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने के लिए अंडे, दालें और पनीर को डाइट में शामिल करें।
3. इफ्तार – अचानक मीठा खाने से बचें
पूरे दिन की फास्टिंग के बाद शुगर लेवल को स्थिर रखने के लिए इफ्तार में संयम जरूरी है।
खजूर का सेवन – इफ्तार की शुरुआत केवल एक खजूर से करें। एक से अधिक खजूर शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है।
तले-भुने से परहेज – समोसे, पकौड़े और बाजार के मीठे शरबत के बजाय ताजे फल, दही और बिना चीनी वाले पेय पदार्थों का चुनाव करें।
4. हाइड्रेशन और फिजिकल एक्टिविटी
पानी की मात्रा – इफ्तार से सेहरी के बीच कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। नारियल पानी और नींबू पानी बेहतरीन विकल्प हैं।
कैफीन से दूरी – चाय और कॉफी का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट (पानी की कमी) करते हैं।
हल्की एक्टिविटी – रोजे के दौरान भारी व्यायाम न करें। दिन में तेज धूप में निकलने से बचें ताकि शरीर में पानी सुरक्षित रहे।
विशेषज्ञों की चेतावनी – कब तोड़ देना चाहिए रोजा?
डॉक्टरों के अनुसार, यदि दिन के दौरान शुगर लेवल 70 mg/dl से कम हो जाए या 300 mg/dl से ऊपर चला जाए, तो यह आपातकालीन स्थिति हो सकती है। ऐसे में मरीज को तुरंत रोजा तोड़कर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए





