भारतीय खाद्य निगम की जांच में 16 नमूने और अमानक पाए गए हैं। यह चावल मनुष्यों के खाने योग्य नहीं है। प्रदेश में अभी तक गोदामों से चावल के डेढ़ हजार से ज्यादा नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।

भोपाल (राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि): बालाघाट और मंडला के बाद प्रदेश के अनूपपुर, शिवपुरी, भिंड, देवास और इंदौर जिले की राशन दुकानों पर भी पोल्ट्री ग्रेड (मुर्गी आहार योग्य) का चावल पाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम की प्रयोगशाला में जैस-जैसे नमूनों की जांच होती जा रही है, वैसे-वैसे रिपोर्ट राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को भेजी जा रही है। इनकी केंद्र सरकार की प्रयोगशाला में जांच कराई जा रही है। 559 नमूनों की जांच कर प्रारंभिक रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें से 16 नमूने पोल्ट्री ग्रेड के पाए गए हैं।
इसके बाद पूरे प्रदेश से भारतीय खाद्य निगम और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के संयुक्त दल बनाकर चावल के नमूने (सैंपल) लिए गए। यह चावल मनुष्यों के खाने के योग्य नहीं है। ऐसा ही मामला केंद्र सरकार की जांच में बालाघाट और मंडला में सामने आया था।
बताया जा रहा है कि शिवपुरी, भिंड, देवास और इंदौर के गोदामों में चावल बालाघाट, मंडला, अनूपपुर, जबलपुर, कटनी आदि क्षेत्रों से ही पहुंचा है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किया जाना था। निगम के अधिकारियों का कहना है कि जिस चावल के भंडार का नमूना लिया जाता है, वह अधिकतम 160 टन का होता है।
इसके लिए नागरिक आपूर्ति निगम सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर रहा है। दरअसल, प्रदेश में पीडीएस के तहत गेहूं और चावल हर माह वितरित होता है। जांच के चलते अभी चावल वितरण पर रोक है।अब गुणवत्तायुक्त चावल लेंगे, अधिकारियों के अनुसार अब यह पता लगाया जाएगा कि किस मिलर ने घटिया चावल की आपूर्ति की थी। उस मिलर को यह चावल वापस लौटाया जाएगा। वहीं, जिन चावल के नमूने गुणवत्तायुक्त पाए गए हैं, उनका वितरण शुरू किया जाएगा।
मिलर को चावल लौटाकर उससे गुणवत्तायुक्त चावल लिया जाएगा। गुणवत्ताहीन चावल लेने के लिए दोषी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक अभिजीत अग्रवाल का कहना है कि जांच के जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अमानक चावल के मामले में कस्टम मिलिंग नीति के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पता नहीं शिवराज सरकार प्रदेश की गरीब जनता को जानवरों के खाने लायक गेहूं और चावल खिलाने पर क्यों उतारू है। क्यों उन्हें अच्छी गुणवत्ता का राशन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में राशन दुकानों से पोल्ट्री ग्रेड के चावल के बाद अब सड़े हुए गेहूं का वितरण किया जा रहा है। इसमें भी भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इस भ्रष्टाचार का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है।