तालिबान और पाकिस्तान के बीच क्यों हुई जंग… दोनों यार बन गए दुश्मन

एक दौर था जब पाकिस्तान और अफगान तालिबान की नजदीकियों की मिसालें दी जाती थीं। बीती सदी के 90 के दशक में तालिबान के उदय के पीछे पाकिस्तान का हाथ माना जाता था। भारत के खिलाफ ‘रणनीतिक बढ़त’ (Strategic Depth) हासिल करने के लिए पाकिस्तान ने जिस तालिबान को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया, आज वही उसके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है।
दशकों पुरानी यह ‘गहरी दोस्ती’ अब खून-खराबे और हवाई हमलों में तब्दील हो गई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कल के मददगार आज एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए?
खूनी संघर्ष: दावों और पलटवार का दौर
हालिया हफ्तों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर है। सोमवार रात पाकिस्तान ने काबुल में भीषण हवाई हमला किया, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने केवल आतंकी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है, जबकि तालिबान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।
फरवरी में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई हिस्सों पर एयरस्ट्राइक की थी। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने इसे एक ‘खुला युद्ध’ करार दिया है। हालांकि तुर्किये, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों ने मध्यस्थता कर संघर्ष विराम की कोशिशें की हैं, लेकिन सीमा पर झड़पें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
सत्ता मिलते ही बदले तालिबान के तेवर
साल 2021 में जब तालिबान ने काबुल की सत्ता संभाली, तो पाकिस्तान में जश्न मनाया गया था। इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि तालिबान उनके इशारों पर चलेगा। लेकिन जल्द ही यह भ्रम टूट गया। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि तालिबान शासन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों को पनाह दे रहा है। साथ ही, बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले विद्रोहियों के लिए भी अफगानिस्तान एक ‘सुरक्षित ठिकाना’ बन गया है। काबुल इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है।
TTP: पाकिस्तान के लिए भस्मासुर बना अपना ही साया
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती टीटीपी (TTP) यानी पाकिस्तान तालिबान है। 2007 में गठित यह संगठन पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सक्रिय है। 2012 में मलाला यूसुफजई पर हमला करने वाला यही संगठन आज पाकिस्तानी सेना और पुलिस के लिए काल बन गया है। पाकिस्तान का दावा है कि 2024 के अंत से हुए सात बड़े आत्मघाती हमलों के तार अफगानिस्तान में बैठे आतंकियों से जुड़े हैं।
दांव जो उल्टा पड़ गया
पाकिस्तान ने जिस तालिबान को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वही उसकी सीमा के अंदर अस्थिरता का सबसे बड़ा कारण है। काबुल और इस्लामाबाद के बीच का यह संघर्ष न केवल इन दो देशों, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।





