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उदयपुर में पर्वतमाला को लेकर तेज़ी से हो रहा विरोध 

अरावली को बचाने की मांग को लेकर ज़ोरदार प्रदर्शन

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अरावली पर्वतमाला को लेकर उदयपुर में विरोध तेज हो गया है. जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसमें कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया.सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अरावली पर्वतमाला को लेकर उदयपुर शहर में आक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है. शिव धरावली क्षेत्र सहित शहर के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों लोग जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और अरावली को बचाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान जिला कांग्रेस और कई सामाजिक संगठनों ने एक सुर में फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की. प्रदर्शन के मद्देनज़र जिला कलेक्ट्रेट के बाहर पुलिस का भारी जाब्ता तैनात किया गया था |

जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, माहौल तनावपूर्ण होता चला गया.इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई, जो देखते ही देखते आपसी भिड़ंत में बदल गई. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. बताया जा रहा है कि सोमवार के प्रदर्शन में अब तक की सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां की गई हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि मेवाड़ की जीवनरेखा है. वक्ताओं ने कहा कि मेवाड़ का इतिहास प्रकृति संरक्षण का प्रतीक रहा है |

मेवाड़ के किले हों या प्राचीन मंदिर, सभी को पहाड़ियों पर इस सोच के साथ बनाया गया कि प्रकृति और पहाड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे. आज अगर अरावली को काटने या कमजोर करने का रास्ता खोला गया, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा. आक्रोशित लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अरावली को नुकसान पहुंचा तो उदयपुर और आस-पास के इलाकों में हालात दिल्ली जैसे हो सकते हैं. प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाएगा, हवा जहरीली हो जाएगी और लोगों को घरों से बाहर निकलने में डर लगेगा. उन्होंने कहा कि मेवाड़ की शुद्ध हवा के पीछे सबसे बड़ा कारण अरावली की पहाड़ियां हैं |

प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि राजस्थान में अरावली पर्वतमाला का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है. ऐसे में इसका सबसे गहरा असर राजस्थान पर ही पड़ेगा. उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल रद्द करना चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है तो संसद में विधेयक लाकर इस फैसले को निरस्त किया जाए. कलेक्ट्रेट के बाहर गूंजते नारों के बीच एक ही आवाज सुनाई दी कि अरावली मेवाड़ का गौरव है और इसके साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा |

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