पतंगबाजी के लिए शहर की छतें फुल:अहमदाबाद के कई इलाकों में ऊंची छतों का किराया 20 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक पहुंचा

गुजरात में मकर संक्रांति का मतलब है पतंगबाजी। राज्य में पतंगबाजी की तैयारियां एक-दो महीने पहले से ही शुरू हो जाती हैं। इसके चलते पिछले कुछ वर्षों में ‘छत पर्यटन’ का चलन भी शुरू हो गया है। इस साल भी अहमदाबाद के पोल, खाडिया और रायपुर इलाकों में सभी ऊंची छतें बुक हो चुकी हैं। छतों का किराया 20 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक जा पहुंचा है।
ओल्ड अहमदाबाद में रहने वाले बड़ी संख्या में लोग अब विदेशों में बस गए हैं। इसलिए ये पतंगबाजी के साथ अपनी पुरानी यादें ताजा करने हर साल यहां आते हैं। दरअसल, रायपुर इलाके में शहर का सबसे बड़ा पतंग मार्केट भी है।
इसके चलते यहां की पतंगबाजी भी पूरे अहमदाबाद में फेमस है।
एनआरआई और विदेशी भी यहां आते हैं पोल में रहने वाले और हर साल उत्तरायण पर छतें किराए पर देने वाले जिग्नेशभाई रामी ने बताया कि छतें किराए पर देने-लेने का चलन पिछले 4-5 सालों से शुरु हुआ है। अब तो यह अहमदाबाद में आम हो चुका है। जितनी ऊंछी छत, उसका उतना ही ज्यादा किराया।
आमतौर पर छतों का एक दिन (चौबीस घंटे) का किराया 20 से 25 हजार रुपए होता है। मकर संक्रांति के आखिरी वक्त पर किराया लाखों में पहुंच जाता है। हम पतंगों के साथ-साथ सुबह-शाम का नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना भी उपलब्ध कराते हैं।
अहमदाबाद में प्रवासी भारतीय के अलवा पतंगबाजी के लिए काफी संख्या में विदेशी भी आने लगे हैं। वैसे भी त्योहार का असली मजा लोगों के बीच में रहकर आता है। इसी के चलते विदेशी लोग भी होटलों की जगह हमारे इलाके चुनते हैं। इससे वे न सिर्फ त्योहार को एन्जॉय ही करते हैं, बल्कि करीब से भारतीय संस्कृति को देख पाते हैं। इसके अलावा उन्हें घर में रहने जैसी फीलिंग भी आती है।





