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असली या नकली? महंगी पश्मीना शॉल खरीदने से पहले जान लें ये ख़ास बात

पश्मीना शॉल सिर्फ सर्दियों से बचाने वाला कपड़ा नहीं, बल्कि कश्मीर और लद्दाख की पारंपरिक विरासत का हिस्सा है। इसकी ऊंची कीमत के चलते बाजार में आजकल नकली और सेमी-सिंथेटिक पश्मीना आसानी से मिल जाता है। ऐसे में अगर आप 30 से 40 हजार रुपये खर्च करने जा रहे हैं, तो पहले इसकी असलियत पहचानना बेहद जरूरी है।

नकली पश्मीना देखने में बिल्कुल असली जैसा लग सकता है, इसलिए ग्राहक अक्सर धोखा खा जाते हैं। लेकिन कुछ आसान तरीकों से आप शुद्ध पश्मीना की पहचान कर सकते हैं।

ऊन का स्रोत पहचानें

असली पश्मीना लद्दाख में पाई जाने वाली चांगथांगी बकरियों के बेहद महीन अंडरकोट से बनता है। अत्यधिक ठंड में रहने के कारण इनके रेशे बेहद मुलायम, गर्म और हल्के होते हैं, जो किसी अन्य ऊन में नहीं मिलते।

वजन से करें जांच

शुद्ध पश्मीना बेहद हल्का होता है। पूरा शॉल आमतौर पर 180 ग्राम के आसपास और स्टोल करीब 95 ग्राम तक का हो सकता है। अगर शॉल हाथ में भारी लगे, तो वह नकली हो सकता है।

बर्न टेस्ट से सच्चाई

किनारे से निकाले गए धागे को जलाने पर असली पश्मीना बालों की तरह धीरे जलता है और राख बन जाता है। नकली धागा प्लास्टिक की तरह पिघलता है और बदबू देता है।

बुनावट और फिनिशिंग देखें

असली पश्मीना हाथ से बुना जाता है, इसलिए उसमें हल्की असमानता दिख सकती है। मशीन जैसी परफेक्ट फिनिशिंग नकली होने का संकेत है।

जीआई टैग जरूर देखें

खरीदते समय जीआई टैग की मांग करें, जो पश्मीना की प्रामाणिकता और उसके मूल स्थान की पुष्टि करता है।

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