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शराब ना पीने वालों को भी है खतरा , भारत के 38.9% फैटी लिवर के है शिकार

अगर आप यह मानते हैं कि शराब से दूरी आपके लिवर को सुरक्षित रखने के लिए काफी है, तो हालिया शोध के नतीजे आपको चौंका सकते हैं। भारत में फैटी लिवर की समस्या एक गंभीर महामारी का रूप ले रही है। ताज़ा अध्ययन के अनुसार, अब यह बीमारी केवल शराब तक सीमित नहीं रही, बल्कि खराब मेटाबॉलिज्म और बिगड़ती जीवनशैली इसका मुख्य कारण बन गई है।

MASLD: अब मोटापे और शुगर से जुड़ा है लिवर का खतरा

‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया’ में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, इस बीमारी को अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) के नाम से जाना जाता है। रिसर्च के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारत में लगभग 38.9% वयस्क फैटी लिवर से जूझ रहे हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या लिवर फाइब्रोसिस या लिवर स्टिफनिंग जैसी जानलेवा स्थिति में बदल सकती है

MASLD के ये हैं 3 सबसे बड़े गुनहगार

मोटापा और स्क्रीन टाइम: गतिहीन जीवनशैली और घंटों लैपटॉप-मोबाइल के सामने बैठने से बढ़ता मोटापा लिवर पर सीधा हमला करता है।

प्रोसेस्ड फूड का जहर: ज्यादा चीनी, मैदा और खराब तेल वाले फास्ट फूड लिवर में फैट की मात्रा को अनियंत्रित रूप से बढ़ा देते हैं।

डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो वसा (फैट) सीधे लिवर में जमा होने लगता है। यही कारण है कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को इसका सबसे ज्यादा खतरा है।

बचाव के लिए अपनाएं ये 4 गोल्डन रूल्स

वजन नियंत्रण: लिवर में चर्बी जमा होने से रोकने के लिए अपने वजन को संतुलित रखना सबसे पहला और जरूरी कदम है।

हेल्दी डाइट: अपनी थाली में फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज को जगह दें। पैकेट बंद और मीठी चीजों से तौबा करें।

नियमित व्यायाम: शारीरिक सक्रियता इंसुलिन की कार्यक्षमता को बढ़ाती है, जिससे लिवर का फैट प्राकृतिक रूप से कम होता है।

नियमित चेकअप: शुगर लेवल और लिवर की समय-समय पर अल्ट्रासाउंड या फाइब्रोस्कैन के जरिए जांच करवाते रहें।

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