निगम परिषद में तीखी बहस;कलेक्टर गाइडलाइन से नहीं, पुरानी दर से ही होगी टैक्स वसूली

वित्तीय वर्ष 2026-27 में कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार निगम कमिश्नर के संपत्तिकर की दरों के निर्धारण के प्रस्ताव पर शुक्रवार को नगर निगम परिषद की बैठक में चर्चा हुई। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध किया। विरोध को देखते हुए सभापति ने प्रस्ताव को वापस कर दिया और जनता को राहत देते हुए संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूलने निर्णय लिया।
हालांकि, संपत्तियों की बोगस आइडियों को लेकर सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष के पार्षदों में काफी बहस भी हुई और एक दूसरे पर कई तरह के आरोप भी लगाए। यहां तक कि बहस में अमर्यादित शब्दों का भी उपयोग हुआ। नगर निगम परिषद की बैठक शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से स्थानीय जलविहार स्थित परिषद भवन में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता पैनल सभापति गिर्राज कंषाना ने की।
बता दें कि 26 फरवरी को हुए परिषद के विशेष सम्मेलन के एजेंडे में कमिश्नर के 2026-27 की कलेक्टर गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर की दरों के निर्धारण करने का प्रस्ताव शामिल था, लेकिन 26 फरवरी को इस इस बिंदु पर चर्चा नहीं हो पाई थी और इस पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को विशेष सम्मेलन बुलाया गया।
संपत्तियों की ID व राजस्व बढ़ाने पर अधिक चर्चा
सम्मेलन में सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष ने एजेंडे के बिंदु पर तो कम चर्चा की, बल्कि शहर की बोगस संपत्तियों की ID हटाने, 40 प्रतिशत शहर जो संपत्तिकर के दायरे में नहीं हैं, उन्हें दायरे में लाने और पुराने ठहरावों पर अमल कराने पर अधिक बहस की। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे।
यहां तक कि कुछ प्रतिपक्ष के नेताओं ने तो सत्ता पक्ष, महापौर, एमआइसी व अफसरों पर भ्रष्टाचार करने व झूठी जानकारी देने के भी आरोप लगाए। हालांकि, सत्ता पक्ष प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब नहीं दे पाया। ऐसे में प्रतिपक्ष हावी रहा।





