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केदारनाथ यात्रा 2026: बर्फ की चादर के बीच खुलेंगे कपाट: अब तक 5.96 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसके तीन दिन बाद 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिससे वे बर्फ की ऊंची दीवारों के बीच से होकर बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

श्रद्धालुओं के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले दिन हुए 42,405 रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़कर 15 अप्रैल तक 5,96,100 पहुंच गई है।

दैनिक भास्कर ने केदारनाथ धाम की तैयारियों, बर्फबारी की स्थिति और यात्रा प्रबंधन को लेकर रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। उनके मुताबिक, 100 से ज्यादा श्रमिकों ने दिन-रात काम कर बर्फ की मोटी परतों को काटते हुए श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार कर दिया है।

फिलहाल केदारनाथ धाम में बर्फ की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में अभी भी 2 से 3 फीट तक बर्फ जमी है। कुछ दिन पहले यह 4 से 5 फीट तक थी, जो अब धीरे-धीरे कम हो रही है। वहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर कई जगह ग्लेशियर टूटकर गिर गए थे, जहां 3 से 4 प्रमुख ग्लेशियर पॉइंट चिन्हित किए गए हैं।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, थारू और चोराबारी जैसे ग्लेशियरों के टूटकर रास्ते में आने से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। यहां बर्फ की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच गई थी। मजदूरों ने इंसानी कद से भी ऊंची इन बर्फ की दीवारों को काटकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया है।

जब श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके दोनों तरफ 8-9 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें होंगी, जो एक अद्भुत अनुभव होगा।

 

डीएम ने बताया कि यात्रा की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू (लाइन को व्यवस्थित तरीके से संभालना) मैनेजमेंट के साथ ही सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ का मुख्य पहुंच मार्ग अब पूरी तरह से साफ करा दिया गया है। इस भारी बर्फ को हटाने और मार्ग को सुचारू करने के लिए 100 से अधिक अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है।

अब सिर्फ मंदिर परिसर के पास जमी बर्फ को हटाने का काम अंतिम चरण में है। बाबा केदार की पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने से पहले मंदिर, परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह बर्फ से साफ हो जाएगा।

 

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