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सोमवती अमावस्या और अधिक मास का दुर्लभ संयोग: सुख-सौभाग्य, पितृ दोष मुक्ति और अखंड सौभाग्य के लिए विशेष फलदायी

पुरुषोत्तम मास समाप्ति के साथ 15 जून सोमवार को सर्वार्थसिद्धि योग में सोमवती अमावस्या पूर्ण श्रद्धा-भाव के साथ मनाई जाएगी। सनातन धर्म में इस तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है, जो सुख-सौभाग्य, पितृ दोष मुक्ति और अखंड सौभाग्य के लिए विशेष फलदायी है। यह इस साल की पहली सोमवती अमावस्या है। इस अधिकमास की सोमवती अमावस्या को भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

मान्यता है कि इस दिन पति-पत्नी साथ मिलकर शिव-शक्ति की आराधना करें, तो उनके वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा पितरों की शांति के लिए किए गए तर्पण और दान-पुण्य से वंश वृद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। जब बात ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या की हो, तो इसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है। अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह पांच बजकर 23 मिनट से सुबह सात बजकर आठ मिनट तक रहेगा।

नगर के प्रमुख मंदिर सनातन धर्म मंदिर, जनकगंज स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर, फालका बाजार स्थित श्रीराम मंदिर, थाटीपुर स्थित द्वारिकाधीश मंदिर व किलागेट पर स्थित जानकी वल्लभ मंदिर में ठाकुरजी के विग्रह का विशेष शृंगार होगा और खीर-पूड़ी के साथ कई प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा। महिलाएं माता तुलसी की 108 परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगीं।

अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास 15 जून सोमवार को मिथुन संक्रांति पर समाप्त हो जाएगा, और मांगलिक कार्य विवाह आदि प्रारंभ हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि अधिक मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यो पर रोक लगी हुई थी। हिंदू पंचांग के अनुसार, मलमास 15 जून से समाप्त होने के बाद अब 21 जून से विवाह के शुभ मुहूर्त दोबारा शुरू हो रहे हैं। जून और जुलाई के महीनों में शादी-विवाह के लिए निम्नलिखित तिथियां अत्यंत शुभ मानी गई हैं।

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