अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामला: 38 दोषियों की फांसी बरकरार:गुजरात हाईकोर्ट का फैसला

गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। निचली अदालत ने फरवरी 2022 में 38 दोषियों को फांसी और 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
दोषियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। आज जस्टिस एवाई कोगजे और समीर दवे की बेंच ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) से जुड़े लोगों की सजा को सही ठहराया।
कोर्ट ने सरकार को 56 मृतकों के परिजन को 10-10 लाख रुपए और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। कोर्ट ने कहा कि मुआवजा राशि का भुगतान 30 मार्च 2027 तक कर दिया जाए।
2009 में ट्रायल की शुरुआत, लॉकडाउन में भी सुनवाई
धमाकों के बाद पुलिस ने अहमदाबाद की सभी ब्लास्ट साइट्स और सूरत में मिले बमों के मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं। बाद में करीब 35 मामलों को मिलाकर एक बड़ा केस बनाया गया।
सभी मामलों को एक साथ जोड़ने के बाद 2009 में इस केस का ट्रायल शुरू हुआ। जांच और अदालत की सुनवाई 12 साल तक चली। करीब 80 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। कोरोना के समय भी सुनवाई बंद नहीं हुई।
प्रॉसिक्यूशन ने जज एआर पटेल की अदालत में 1,100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए। कोर्ट में 6,000 से अधिक दस्तावेज पेश किए गए। मामले में 5,47 चार्जशीट के कुल 3,47,800 पन्ने दाखिल किए गए, जबकि सिर्फ मुख्य चार्जशीट ही 9,800 पन्नों की थी।





