hi Hindi en English pa Punjabi ur Urdu
State City Dropdown
धर्म
Trending

24 या 25 जुलाई देवशयनी एकादशी व्रत का मान्य कब? जानें शुभ मुहूर्त और पारण का समय

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में ‘योगनिद्रा’ में चले जाते हैं। इसके बाद वे देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। देवशयनी एकादशी से ही ‘चातुर्मास’ (चार महीने का पवित्र समय) शुरू हो जाता है। इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे- शादी, मुंडन या गृह प्रवेश नहीं किया जाता है। यह समय केवल जप, तप, व्रत और भगवान की भक्ति के लिए उत्तम माना गया है।

देवशयनी एकादशी पर बनेंगे शुभ योग

देवशयनी एकादशी पर अमृतसिद्धि योग, शिववास योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग जैसे कई शुभ संयोग बनते हैं। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह नौ बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 25 जुलाई को ही मान्य होगा।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह चार बजकर 16 मिनट से सुबह चार बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

संध्या काल मुहूर्त: शाम सात बजकर 17 मिनट से रात आठ बजकर 19 मिनट तक रहेगा।

पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 26 जुलाई को सुबह पांच बजकर 39 मिनट से आठ बजकर 22 मिनट तक है।

इस दिन व्रत रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

देवशयनी एकादशी पर होगी शालिग्राम जी की पूजा

देवशयनी एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। सूर्य देव को जल चढ़ाएं, फिर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर उसे साफ करें, पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। शालिग्राम जी को उस पर स्थापित करें। शालिग्राम जी का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

one + fifteen =

Back to top button