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मध्यप्रदेश

80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर फहराया तिरंगा

पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं

नई दिल्ली | स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर 76 मिनट की स्पीच दी। पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत राह पर ले जाने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसे लोग हिंसा अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा और इन्हें आइसोलेट करना होगा और विकसित राष्ट्र बनाने की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।’ पीएम ने युवाओं के लिए बड़ी घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि सरकार अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं के लिए कई परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी।

इससे पहले लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाया गया। पीएम ने तिरंगा फहराया। उसके बाद राष्ट्रगान हुआ, 21 तोपों की सलामी दी गई। हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था। आज नक्सल क्षेत्र में नक्सल मुक्त होने के कारण विकास का तिरंगा लहरा रहा है। हमें सावधान रहने की जरूरत है। हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा। इन्हें युवाओं को भटकाने से बचाना होगा।’

हमारी माताओं बहनों को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। वे भारत की नीति में अपना योगदान दें। समय की मांग है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं। आइए महिला आरक्षण लागू करके महिलाओं के सम्मान में आप भी जुड़िए और क्रेडिट लीजिए लेकिन मेरी माताओं बहनों को हक दीजिए। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। हमारी दिशा तय हो चुकी है। हमें उसे प्राप्त करके रहना है। इसके लिए हमें हमारे वर्क कल्चर और हमारी सोच को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आगामी 5-7 साल में करने हैं।

एक समय था जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ एयर कंडीशन चेंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा, लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले 1 दशक में ऐसा लग रहा है कि लोगों ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया।युवाओं पर: ‘एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए ऑनलाइन फ्री कोचिंग व्यवस्था की शुरुआत भी की जाएगी।’

बीते सालों में हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना है। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता। इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। ‘अब छोटे सपनों से काम चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाईयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है।

 

 

 

 

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