मद्रास हाईकोर्ट बोला- नौकरी या दूसरी वजहों से पति जहां जाए, पत्नी का हर बार उसके साथ जाना जरूरी नहीं

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पत्नी से पति के पीछे वोडाफोन के एड वाले पग डॉग की तरह चलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि नौकरी या दूसरी वजहों से पति जहां जाए, पत्नी का हर बार उसके साथ जाना जरूरी नहीं है।
यह मामला उस कपल से जुड़ा है, जो करीब 16 साल से अलग रह रहा था। दोनों की शादी 34 साल पहले, सितंबर 1992 में हुई थी। कपल के चार बच्चे भी हैं। अभी पति की उम्र 67 साल है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच काफी कड़वाहट है और दोबारा साथ आने की कोई संभावना नहीं बची है। कोर्ट ने पति को पत्नी को ₹7 लाख गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया।
फैमिली कोर्ट ने कहा था- अकेले मुंबई जाना पति की गलती
पति ने अपनी तलाक याचिका में बताया था कि वह नौकरी के लिए मुंबई चला गया था लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं गई। फैमिली कोर्ट ने इसी आधार पर पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी।
कोर्ट का मानना था कि पति खुद पत्नी को छोड़कर गया है, इसलिए वह अपने ही गलत आचरण का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को सही नहीं माना।
कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 23(1)(a) में जिस ‘गलत’ आचरण की बात है, उसका मतलब ऐसा गंभीर व्यवहार है जो न्याय और सही आचरण के खिलाफ हो।
पति ने पत्नी पर अवैध संबंध के भी आरोप लगाए थे
पति ने अपनी तलाक याचिका में आरोप लगाया था कि पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने अवैध संबंध के आरोप को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने कहा कि जिस व्यक्ति को पत्नी का प्रेमी बताया गया था, उसे मामले में पक्षकार ही नहीं बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोप में प्रेमी को भी मामले में शामिल करना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर अवैध संबंध के आधार पर लगाया गया आरोप टिक नहीं सकता।
पत्नी ने भी साथ रहने के लिए कोई कदम नहीं उठाया
हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि पति से अलग रहने के दौरान पत्नी ने उसके साथ दोबारा रहने के लिए कोई औपचारिक कदम नहीं उठाया था। उसने पति को वापस साथ रहने के लिए कोई लेटर या कानूनी नोटिस भी नहीं भेजा।
कोर्ट ने समझौते की कोशिश भी की, लेकिन दोनों के बीच बात नहीं बनी। इसी दौरान कोर्ट ने कहा कि हर परिस्थिति में पति-पत्नी का साथ रहना व्यावहारिक नहीं होता।
कोर्ट ने सेना का उदाहरण देते हुए कहा कि बैरक में रहने वाला सैनिक वहां पत्नी के साथ वैवाहिक घर नहीं बसा सकता। पत्नी खुद भी नौकरी कर सकती है। इसलिए यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि नौकरी या दूसरी वजहों से पति जहां भी जाए, पत्नी हर बार उसके साथ चली जाए।





