‘आर्ट ऑफ लिविंग’ पर लगाया ₹5 करोड़ का जुर्माना रद्द; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फ्लडप्लेन को हुए नुकसान से सीधा संबंध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ‘आर्ट ऑफ लिविंग फउंडेशन’ से जुड़ी संस्था ‘व्यक्ति विकास केंद्र’ की अपील को मंजूरी दे दी। इसके साथ दिल्ली में यमुना फ्लडप्लेन पर 2016 में हुए इवेंट के लिए संस्था पर लगाए गए ₹5 करोड़ के पर्यावरण मुआवजे को रद्द कर दिया। इस मामले में, कोर्ट को ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के इवेंट और फ्लडप्लेन को हुए नुकसान को जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत नहीं मिला।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि किसी व्यक्ति को तभी पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जब काम और पर्यावरण को हुए नुकसान के बीच सीधा संबंध साबित हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अपीलकर्ता को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया और जरूरी जानकारी को नजरअंदाज किया। कोर्ट ने पाया कि इवेंट वाली जगह पहले से ही खराब हालत में थी।





