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आवारा कुत्तों का मामला, डॉग फीडर्स की जिम्मेदार तय होगी:कोर्ट ने कहा- पिछली सुनवाई की टिप्पणियों को मजाक समझना गलत

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।’

कोर्ट ने कहा- पिछली सुनवाई की टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं। कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से वह पीछे नहीं हटेगा। क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा- कोर्ट निजी पक्षों की दलीलें पूरी करके आज ही सुनवाई खत्म करना चाहती है। इसके बाद राज्यों को एक दिन का मौका दिया जाएगा।

एडवोकेट के. मोहम्मद असद बोले- इलाज से बेहतर रोकथाम है

मेरा कहना है कि इलाज से बेहतर रोकथाम है। हम जानवरों को नहीं, इंसानों को शिक्षित कर सकते हैं। बचपन से ही लोगों को यह सिखाया जा सकता है कि ऐसी स्थितियों से कैसे निपटना है।

एडवोकेट चारु माथुर बोलीं- राज्यों की चूक साफ दिखाई देती है

मेरी मुवक्किल एक बाल अधिकार कार्यकर्ता हैं और वकील भी। किसी बच्चे के साथ हर डॉग बाइट की घटना में राज्य की जिम्मेदारी निभाने में चूक साफ दिखाई देती है।

वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा- संविधान हमें सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का निर्देश देता है।

संविधान हमें सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का निर्देश देता है। मनुष्य और पशु के टकराव से जुड़े मामलों में यह अदालत अब तक बड़े पैमाने पर वन्यजीवों की रक्षा करती आई है।

व्यक्तिगत तौर पर मैं कहना चाहता हूं कि हमारी ओर से किसी पर भी आरोप नहीं लगाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर जो नकारात्मक प्रचार हुआ है, उसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूं। ऐसा उचित नहीं है। फैसला माननीय न्यायालय को ही करना है। सुनवाई से बाहर आकर वीडियो जारी नहीं किए जाने चाहिए।

स्थानीय नगर निगमों को चाहिए कि वे आवारा कुत्तों से निपटने के लिए ज्यादा और बेहतर प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति करें। कृपया उन जीवों के जीवन के प्रति भी करुणा रखें, जो बोल नहीं सकते। यह दुनिया किसी उच्च शक्ति द्वारा हमें साझा करने के लिए दी गई है। संतुलन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जरूरी है।

वकील मनोज शिरसाट बोले- आवारा कुत्तों को कंट्रोल करना नगर निगम और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी

जस्टिस ओका जब बॉम्बे हाईकोर्ट के जज थे तब एक फैसले में उन्होंने कहा था कि आवारा कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण न कर पाना संविधान के अनुच्छेद 21 के दायित्व का उल्लंघन है।

फैसले में स्पष्ट किया गया कि किसी क्षेत्र में आवारा कुत्तों को नियंत्रित करना नगर निगम और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। यदि आवारा कुत्तों के कारण किसी की मौत होती है, तो यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन माना जाएगा और राज्य सरकार मुआवजा देने की जिम्मेदार होगी।

 

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