भ्रष्टाचार की खुली पोल; सरपंच ने पुत्र के खाते में कर दिया निर्माण कार्यों का भुगतान,सीईओ ने पद से हटाया

जबलपुर जिले की ग्राम पंचायतों में सरपंच, सचिव द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की पोल खुलने लगी है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने एक ऐसे ही मामले में सुनवाई करते हुए सरपंच को दोषी पाया और उसे हटा दिया है।
जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत टिकुरी की सरपंच सीतादेवी चौकसे ने पंचायत निधि का दुरुपयोग किया। सामुदायिक भवन, चबूतरा एवं पंचायत भवन निर्माण कार्यों के लिए खरीदी सामग्री का भुगतान जो करीब एक लाख 11 हजार 50 रुपए था, उसे अपने पुत्र सिद्धांत चौकसे के खाते में जमा करा दिया।
न्यायालय विहित प्राधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जबलपुर के न्यायालय में मामले की सुनवाई की गई। यह तथ्य स्वयं सरपंच ने स्वीकार किया, जिसकी पुष्टि पंचायत दर्पण पोर्टल के अभिलेखों से भी हुई। न्यायालय ने माना कि यह कृत्य पंचायत राज अधिनियम की धारा 40(1) (स्पष्टीकरण ‘ग’) के अंतर्गत अवचार की श्रेणी में है।
पंचायत निधि का भुगतान पुत्र को करना कानून विरुद्ध है और यह पद का दुरुपयोग है। इस पर कार्रवाई करते हुए सीतादेवी चौकसे को सरपंच पद से पृथक कर दिया गया।
पंचायत समन्वय अधिकारी निलंबित
इधर जिला पंचायत जबलपुर ने योजनाओं की समीक्षा बैठक में गंभीर लापरवाही पर पंचायत समन्वय अधिकारी राकेश सोनकर, जनपद पंचायत कुण्डम को निलंबित कर दिया है।
समीक्षा में पाया गया कि सोनकर द्वारा शासन की योजनाओं जैसे ई-केवाईसी, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा तथा धरती-आभा योजना के क्रियान्वयन में लक्ष्य हासिल नहीं किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत 279 आवासों में से केवल 89 आवास ही पूर्ण पाए गए।




