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राजस्थान

दहेज की मांग को लेकर पीड़ित हो रही महिला और डेढ़ वर्ष पुत्री

गवाहों के आधार पर पति को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि फलोदी। दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ना झेल रही एक विवाहिता और उसकी डेढ़ वर्षीय पुत्री की हत्या के नौ वर्ष पुराने मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय, फलोदी ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पति को दोषी करार दिया है। अदालत ने मामले में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पति को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई, वहीं सास-ससुर को भी साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी माना गया। जिला एवं सेशन न्यायाधीश चक्रवर्ती महेचा की अदालत ने वर्ष 2017 के चर्चित दहेज हत्या प्रकरण में यह निर्णय सुनाया। मामला पुलिस थाना जांबा क्षेत्र के धोलासर गांव का है, जहां दहेज की मांग को लेकर विवाहिता समता को लगातार प्रताड़ित किए जाने का आरोप था।

करीब नौ साल पहले 21 मार्च 2017 को मृतका के भाई हुकमाराम ने जांबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि बहन समता को उसका पति लक्ष्मणराम, सास छोटी देवी, ससुर घेवरराम तथा अन्य परिजन दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे। कई बार समझाइश के बावजूद प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि 19 मार्च 2017 को समता और उसकी डेढ़ वर्षीय पुत्री सरोज की हत्या कर दी गई तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शवों को दफनाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।करीब नौ साल पहले 21 मार्च 2017 को मृतका के भाई हुकमाराम ने जांबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि बहन समता को उसका पति लक्ष्मणराम, सास छोटी देवी, ससुर घेवरराम तथा अन्य परिजन दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे। कई बार समझाइश के बावजूद प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि 19 मार्च 2017 को समता और उसकी डेढ़ वर्षीय पुत्री सरोज की हत्या कर दी गई तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शवों को दफनाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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