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उत्तर प्रदेश

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल:दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सीएम योगी

उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। पीएम के सरकारी आवास सात लोक कल्याण मार्ग पर हुई यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। नए वर्ष में दोनों नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक बैठक थी।

दिल्ली में उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद

इस मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री से संभावित फेरबदल और नए मंत्रियों को शामिल किए जाने को लेकर विचार-विमर्श किया। इस समय दिल्ली में उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद हैं, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है।

मुख्यमंत्री योगी की अमित शाह से भी मुलाकात प्रस्तावित

प्रधानमंत्री से भेंट के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी उनकी बातचीत होने की संभावना है। इन सभी बैठकों को मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 54 मंत्री हैं

इससे पहले सोमवार को लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके नाती और मंत्री संदीप सिंह के आवास पर पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके बाद वह नई दिल्ली रवाना हुए।

वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी अभी छह पद रिक्त हैं। हाल ही में यूपी सरकार के मंत्री रहे जितिन प्रसाद और अनूप प्रधान के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद ये पद खाली हुए हैं। इसके अलावा कुछ मंत्रियों को हटाए जाने या विभागों में फेरबदल की भी चर्चा है।

संगठन की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं

माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव और इसी वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। इसी कारण संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर लगातार मंथन चल रहा है।

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