पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर कार्यालय ग्वालियर की गड़बड़ी उजागर….एक दिन में एक ठेकेदार को सौंपे 15 सड़क कार्य….

लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों में पूर्व योग्यता के मापदंड को लेकर चीफ इंजीनियर कार्यालय स्तर पर गड़बड़ी हुई। संचयी बोली क्षमता का मूल्यांकन किए बिना ही एक ही दिन में एक ही ठेकेदार को 21 करोड़ 91 लाख के 15 सड़क निर्माण कार्य सौंप दिए गए।
प्रतिशत दर निविदा के दस्तावेजों में पूर्व योग्यता मानदंड के अभाव के कारण वास्तविक बोली क्षमता का आकलन किए बिना ही ठेकेदार को कार्य सौंप दिए गए। यह सभी कार्य नौ से 12 महीने की देरी से पूरे किए गए। कैग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। शासन के द्वारा इस तथ्य को स्वीकार किया गया और कहा कि पूर्व योग्यता मानदंड घटाकर दो करोड़ कर दिया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्व योग्यता एक ऐसी विधि है जिसका उपयोग उन ठेकेदारों की पहचान करने के लिए किया जाता है जो योग्य हैं और किसी के लिए बोली लगाने में रुचि रखते हैं। यह एक सूचना एकत्र प्रक्रिया है जो निविदा-खरीद प्रक्रिया की शुरुआत केश की क्षमता, सामर्थ संसाधनों और प्रदर्शन का आकलन करती है। न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने वाले ऑका बोली क्षमता के लिए आगे मूल्यांकन किया जाता है।
लेखा परीक्षा ने (अगस्त 2023 और जनवरी 2024) में प्रतिशत निविदाओं के दस्तावेजों में देखा कि पांच करोड़ तक के मूल्य के सड़क कार्यों के लिए पूर्व योग्यता के मानदंड की आवश्यकता नहीं थी। इस प्रकार, इच्छुक बोलीदाताओं की वास्तविक क्षमता का आकलन करने के लिए कोई मानदंड नहीं था।
इससे बोलीदाताओं के लिए बोली लगाने और कई अनुबंध (पांच करोड़ से कम) प्राप्त करने का रास्ता साफ हो गया, जिसके परिणामस्वरूप अयोग्य बोलीदाताओं को अनुबंध प्रदान किए। लेखापरीक्षा के अनुरोध पर, पीडब्ल्यूडी, मध्यप्रदेश शासन ने 25 मार्च 2025 के आदेश के तहत दो करोड़ और उससे अधिक मूल्य के सभी कार्यों के लिए पूर्व-योग्यता मानदंड अनिवार्य कर दिया है जिसे पांच करोड़ रुपये से संशोधित किया गया है।
रेलवे की सीमा को लेकर सामने आई बड़ी गड़बड़
लगातार विवादों में रहने वाले न्यूट्रिक ग्रुप में अब गार्डन सिटी में रेलवे की सीमा को लेकर बड़ी गड़बड़ सामने आई है। खुद कैग की रिपोर्ट में यह सामने आया है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार गार्डन सिटी ने रेलवे की सीमा से निर्धारित दूर नहीं रखी और भारतीय रेलवे की नियमावली का उल्लंघन किया।
खास बात यह कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने अपने लेआउट में रेलवे की लाइन का प्रदर्शन ही नहीं किया और रेलवे की भूमि के 30 मीटर भीतर अनुमति दे दी। भौतिक सत्यापन के दौरान यह पूरा मामला सामने आ गया। कैग की रिपोर्ट में गार्डन सिटी टाउनशिप के फोटो स्थिति को दिखाते हुए शामिल किए गए हैं।
बता दें कि ग्वालियर में झांसी हाईवे पर न्यूट्रिक ग्रुप, गुप्ता परिवार की गार्डन सिटी टाउनशिप स्थित है। कुछ दिन पहले ही यह टाउनशिप सरकारी नाले को दबाने के मामले में चर्चा में आई थी और जिला प्रशासन व रेलवे लाइन की टीम भी जांच के लिए पहुंची थी। अब कैग की रिपोर्ट में यह बड़ी खामी सामने आई है।
भूपरिमाण एवं बंदोबस्त विभाग मप्र शासन के आदेश फरवरी 1981 व पश्चिम मध्य रेलवे जोन के पत्र मई 2005 के अनुसार भारतीय रेलवे पथ नियमावली के पैरा 3728 ई के प्रविधानुसार रेलवे सीमा से 30 मीटर की दूरी के भीतर किसी भी प्रकार के निर्माण या विकास कार्य अनुमति योग्य नहीं है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ग्वालियर के अभिलेखों की जांच व चयनित प्रकरणों के भौतिक सत्यापन में यह पाया गया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने रेलवे की सीमा को प्रदर्शित नहीं किया था। इस मामले में शासन की ओर से जांच के लिए आश्वासन दिया गया है। कैग की रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि आगे की कार्रवाई प्रतीक्षारत है।
ग्वालियर के छह प्रकरणों में खनिज अधिकारी ने कम आंकी रायल्टी
कैग की रिपोर्ट में प्रदेश के सात जिला खनिज अधिकारियों ने खनिज की कम रायल्टी आंकी जिस कारण शासन को कम राजस्व मिला, इसमें ग्वालियर भी शामिल है। जिला खनिज अधिकारी की ओर से गौण खनिज में प्रत्याशित रायल्टी के कम मूल्यांकन के कारण शुल्क व उपकर की कम राशि अधिरोपित की गई। प्रदेश के कुल 36 प्रकरण हैं और सात जिला खनिज अधिकारी हैं। ग्वालियर जिले के छह प्रकरण हैं। यह प्रकरण, स्टोन, लौह अयस्क, गिट्टी की रायल्टी से संबंधित हैं।
रायल्टी के आधार पर ही स्टांप शुल्क, मुद्रांक शुल्क और उपकर लिया जाता है, इस कारण जब रायल्टी का आकलन ही कम किया गया तो इन शुल्कों में भी कम राशि रही। कैग की रिपोर्ट में 36 प्रकरणों में कुंवर रानी अयोध्या सिंह की लौह अयस्क खदान, निसार खान की फ्लैग स्टोन, रामनिवास शर्मा की गिट्टी, गिर्राज सिंह परमार की गिट्टी खदान, केदार सिंह यादव की गिट्टी, सुरेंद्र सिंह परमार की गिट्टी, राधारानी स्टोन इंडस्ट्रीज की गिट्टी खदान शामिल हैं।





