
रमजान का महीना इबादत, आत्म-संयम और पाकीजगी का प्रतीक है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सहरी से इफ्तार तक अन्न-जल का त्याग कर खुदा की राह में मशगूल रहते हैं। शाम को जब इफ्तार का वक्त होता है, तो दस्तरख्वान पर सबसे प्रमुख स्थान ‘खजूर’ को दिया जाता है। आखिर खजूर से ही रोजा खोलने की यह परंपरा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ विज्ञान के भी गहरे तर्क छिपे हैं।
इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना ‘सुन्नत’ माना जाता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद (PBUH) हमेशा खजूर से अपना रोजा इफ्तार करते थे। उन्होंने खजूर को एक ‘मुबारक’ (Blessed) फल बताया है। मान्यता है कि खजूर से रोजा खोलने से इबादत में बरकत होती है। यदि खजूर उपलब्ध न हो, तो पानी से रोजा खोलने की सलाह दी जाती है, क्योंकि पानी शुद्धता का प्रतीक है।





