hi Hindi en English pa Punjabi ur Urdu
State City Dropdown
ताजा खबरेंबिज़नेस
Trending

1-अप्रैल से होंगे इनकम टैक्स के नए नियम लागू: घर-गाड़ी, रिटायरमेंट फंड और एम्प्लॉयर गिफ्ट्स पर टैक्स लगेगा

केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू करने जा रही है। यह नया कानून मौजूदा इंकम-टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। इनकम-टैक्स रूल्स 2026 के ड्राफ्ट के मुताबिक, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों और बड़े बिजनेस घरानों के लिए टैक्स कैलकुलेशन के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।

इन ड्राफ्ट नियमों को 22 फरवरी 2026 तक जनता के सुझावों के लिए रखा गया था। नए नियमों का मकसद सैलरी के साथ मिलने वाली सुविधाओं जैसे- कंपनी का घर, कार और गिफ्ट्स की वैल्यू तय करने के लिए एक फिक्स फॉर्मूला बनाना है, ताकि टैक्स असेसमेंट यानी कैलकुलेशन में पारदर्शिता रहे।

इनकम-टैक्स रूल्स 2026 आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इसका मतलब है कि ये नियम वित्त वर्ष 2026-27 की कमाई और असेसमेंट ईयर 2027-28 के टैक्स रिटर्न पर लागू होंगे।

यह नया इनकम-टैक्स एक्ट 2025 को सपोर्ट करने के लिए लाया गया है। जिसमें टैक्स कैलकुलेशन की प्रोसेस को और सरल बनाया गया है।

2. रिटायरमेंट फंड में ₹7.5 लाख से ज्यादा योगदान पर टैक्स

अगर आपकी कंपनी आपके PF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में सालभर में ₹7.5 लाख से ज्यादा जमा करती है, तो अब उस पर टैक्स लगेगा।

ड्राफ्ट रूल्स में एक खास फॉर्मूला दिया गया है, जिससे ₹7.5 लाख की सीमा से ऊपर वाले कॉन्ट्रीब्यूशन और उस पर मिलने वाले रिटर्न (ब्याज/लाभांश) को ‘टैक्सेबल पर्र्क्स’ माना जाएगा।

3. कंपनी के एकोमोडेशन की वैल्यू फिक्स होगी

प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को मिलने वाले एकोमोडेशन यानी घर की टैक्स वैल्यू अब शहर की आबादी के आधार पर तय होगी…

• 40 लाख से ज्यादा आबादी: सैलरी का 10% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।

• 15 से 40 लाख की आबादी: सैलरी का 7.5% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।

• अन्य शहर: सैलरी का 5% हिस्सा। यदि कर्मचारी खुद कुछ किराया चुका रहा है, तो उसे इस वैल्यू में से घटा दिया जाएगा।

4. लीज पर लिए घर के लिए अलग नियम

अगर कंपनी खुद घर किराए पर लेकर कर्मचारी को देती है, तो नियम अलग होगा। इस मामले में कंपनी द्वारा चुकाया गया वास्तविक किराया या कर्मचारी की सैलरी का 10%, इनमें से जो भी कम हो उसे टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा। यह नियम मेट्रो शहरों के लीज रेंटल पर लागू होगा।

5. ऑफिस की कार का इस्तेमाल अब महंगा पड़ेगा

ऑफिस की गाड़ी पर्सनल और आधिकारिक दोनों कामों के लिए इस्तेमाल करने पर फिक्स मंथली टैक्स वैल्यू तय की गई है…

• 1.6 लीटर इंजन तक: ₹5,000 प्रति महीना।

• 1.6 लीटर से बड़े इंजन: ₹7,000 प्रति महीना।

• ड्राइवर की सुविधा: ₹3,000 प्रति महीना अतिरिक्त।

इन फिक्स वैल्यू को सैलरी इनकम के साथ जोड़कर टैक्स निकाला जाएगा।

6. त्यौहार पर गिफ्ट्स की लिमिट ₹15,000 की

कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट, वाउचर या टोकन अब सालभर में कुल ₹15,000 तक ही टैक्स-फ्री होंगे। अगर पूरे साल में गिफ्ट्स की वैल्यू ₹15,000 से ज्यादा हुई, तो पूरी राशि पर टैक्स देना होगा। अब तक यह सीमा काफी कम थी।

7. ऑफिस में ₹200 तक का खाना टैक्स-फ्री

वर्किंग ऑवर्स के दौरान मिलने वाले खाने या नॉन-अल्कोहलिक बेवरेज पर टैक्स नहीं लगेगा, बशर्ते उसकी वैल्यू ₹200 प्रति मील से ज्यादा न हो। इसमें ऑफिस कैंटीन, मील कूपन और कॉर्पोरेट मील प्रोग्राम शामिल हैं।

8. एम्प्लॉयर से लिए गए लोन पर टैक्स

अगर कंपनी बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है, तो उस फायदे पर टैक्स लगेगा। टैक्स का कैलकुलेशन SBI की ब्याज दर के आधार पर होगी। ₹2 लाख तक के लोन या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए लिए गए लोन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

9. टैक्स-फ्री इनकम से जुड़े खर्चों पर नियम

अगर आप ऐसी कमाई करते हैं जिस पर टैक्स नहीं लगता, तो उससे जुड़े खर्चों को क्लेम करने का नया फॉर्मूला आया है। निवेश की एवरेज सालाना वैल्यू का 1% हिस्सा खर्च के रूप में माना जाएगा, लेकिन यह राशि आपके द्वारा क्लेम किए गए कुल खर्च से ज्यादा नहीं हो सकती।

10. विदेशी डिजिटल बिजनेस पर ₹2 करोड़ की लिमिट

डिजिटल बिजनेस करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए ‘सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रेजेंस’ की सीमा तय की गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

twelve − one =

Back to top button