होर्मुज संकट के बीच ईरान ने अपने व्यापार का रुख बदला, कैस्पियन सागर से बढ़ा रहा व्यापार

अमेरिका इजरायल और ईरान संघर्ष शुरु होने के बाद से ही दुनिया का जरुरी समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz)
प्रभावित है। इसके प्रभावित होने से जहां दुनिया के लिए कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होती है, तो ईरान और मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों का व्यापार और खाद्य सामग्री भी बाधित होती है। होर्मुज को एक ओर से ईरान बंद किए हुए है तो दूसरी ओर से अमेरिका ने भी इस पर नाकेबंदी की हुई है।
ऐसे में अब होर्मुज संकट के बीच ईरान ने अपने व्यापार का रुख उत्तर की ओर करना शुरू कर दिया है। दक्षिणी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के दबाव के बीच ईरान अब कैस्पियन सागर (Caspian Sea)
के बंदरगाहों और उत्तरी जमीन की सीमाओं से जरूरी सामान मंगाने पर जोर दे रहा है। खासतौर पर गेहूं, मक्का, जौ और तिलहन जैसे सामानों को उत्तर के रास्ते लाने की प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, कैस्पियन सागर का रास्ता दक्षिणी बंदरगाहों की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता।
कैस्पियन बंदरगाहों से बढ़ा जरूरी सामान
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के बंदरगाह संगठन के प्रमुख मोहम्मद शकीबी-नसब ने कहा कि देश की कुल बंदरगाह क्षमता करीब 30 करोड़ टन है, लेकिन उत्तरी बंदरगाहों की क्षमता सिर्फ 3 करोड़ टन है। इसके बावजूद जरूरी सामान की ढुलाई में उत्तरी बंदरगाहों की हिस्सेदारी युद्ध से पहले के 18 फीसदी से बढ़कर अब 30 फीसदी हो गई है। यानी दक्षिणी बंदरगाहों पर दबाव बढ़ने के बाद उत्तर के रास्ते का इस्तेमाल बढ़ा है।
कंटेनर पहुंचने में 50% की बढ़ोतरी
गिलान प्रांत के गवर्नर हादी हघशेनास ने सितंबर की शुरुआत में बताया कि 22 अगस्त तक खत्म हुए पांच ईरानी कैलेंडर महीनों में कैस्पियन बंदरगाहों पर कंटेनर पहुंचने में सालाना आधार पर 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई। इन बंदरगाहों में अंजली, अमीराबाद और नौशहर शामिल हैं। इनकी एक खासियत यह भी है कि ये तेहरान, इस्फहान और अराक जैसे मध्य ईरान के शहरों के ज्यादा करीब हैं, जिससे सामान को आगे पहुंचाने की लागत कम हो सकती है।





