मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग हुआ सख़्त;प्राइवेट स्कूलों को 15 फरवरी तक फीस और किताबों की देनी होगी जानकारी

राज्य सरकार ने शुल्क अधिनियम 2020 को लागू किया था ताकि निजी स्कूल मनमाने तरीके से शुल्क न बढ़ा सकें और अभिभावकों का शोषण न हो। इस अधिनियम के तहत सत्र शुरू होने से पहले स्कूलों को फीस संरचना, किताबों की सूची सहित अन्य जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर देनी होती है,लेकिन निजी स्कूल का इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
अब स्कूल शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों पर सख्ती की तैयारी कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा में पाया गया कि भोपाल में ही करीब 150 निजी स्कूलों ने अब तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय या निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर फीस संरचना और पाठ्य-पुस्तकों की सूची जमा नहीं की है।
अब मार्च से स्कूलों का नया सत्र शुरू होने वाला है। इस कारण विभाग ने संबंधित निजी स्कूलों को 15 फरवरी तक की अंतिम समय-सीमा दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तय तिथि तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे स्कूलों पर जुर्माना, नोटिस और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
तीन साल तक नहीं बदल सकेंगे यूनिफार्म
निर्देशों में कहा गया है कि निजी स्कूल तीन वर्षों तक स्कूल गणवेश में कोई बदलाव नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही किताबों और गणवेश पर स्कूल का नाम अंकित करना प्रतिबंधित रहेगा, ताकि अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने के लिए मजबूर न किया जा सके। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी एक तय दुकान से स्कूल की किताबें या गणवेश बिकते पाए गए, तो संबंधित दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।





