
एक शिक्षक ने बैंक की तकनीकी समस्या और बाद बैंक अधिकारी के बर्ताव से आहत होकर लगभग 13 साल तक लंबी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। एटीएम में गड़बड़ी के दो हजार रुपये निकालने पर एक हजार रुपये ही मिला। आहरण पर्ची में दो हजार रुपये आहरण किया जाना अंकित होकर निकला। उक्त शिक्षक ने जब इसकी शिकायत संबंधित बैंक प्रबंधन से की तो उनपर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया। पीड़ित उपभोक्ता शिक्षक जयराम पटेल और उनकी पत्नी निर्मला पटेल को निरपराध होने के बाद भी बैंक से दुत्कार मिला। इससे शिक्षक दंपति आहत हुए कि बैंक की लापरवाही और दुर्व्यवहार के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ी। इनकी लिखित शिकायत पर कहीं सुनवाई नहीं हुई।
एटीएम कार्ड में दिए गए टोल फ्री नंबर पर कॉल करने पर गड़बड़ी सुधारकर खाते में राशि का समायोजन कर दिए जाने आश्वस्त किया गया। किन्तु परिणाम शून्य रहा। पटेल दंपति ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। जिला के बाद राज्य और राज्य के बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग नई दिल्ली तक लड़ाई लड़ी। लगभग पांच साल तक न्याय के लिए लड़ने के बाद इस दंपति को एक लाख पैंसठ हजार रुपये से अधिक हर्जाना देने का आदेश राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) से हुआ है।





