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क्या ईरान में आएगी कयामत की रात? अमेरिका-इजरायल मोर्चे में सऊदी अरब और यूएई भी हुए शामिल

मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद पिछले 25-26 दिनों से क्षेत्र में तनाव चरम पर बना हुआ है। अब सामने आई नई रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं।

मौजूदा हालात संकेत देते हैं कि मिडिल ईस्ट में यह टकराव और गहरा सकता है, जिसमें क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।

सऊदी अरब का रुख बदला

The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को किंग फहद एयर बेस तक पहुंच देने पर सहमति जताई है। यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले सऊदी अरब ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए करने से इनकार किया था।

यूएई ने ईरान से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यूएई ने ईरान से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाते हुए कुछ संपत्तियों के खिलाफ कदम उठाए हैं। इनमें ईरानी स्वामित्व वाले एक अस्पताल और एक क्लब को बंद करना शामिल है। इसे तेहरान के प्रभाव को सीमित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

बहरीन से मिसाइल लॉन्च होने के संकेत

रिपोर्ट में सामने आए वीडियो के अनुसार, ईरान पर हमलों में इस्तेमाल कुछ मिसाइलें बहरीन से दागी गई हो सकती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि इस संघर्ष में क्षेत्रीय स्तर पर भागीदारी पहले से ज्यादा व्यापक हो सकती है।

अमेरिका ने टिप्पणी से किया इनकार

अमेरिकी सेना ने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है कि उसे क्षेत्रीय सहयोगियों से कितनी मदद मिल रही है। हालांकि, इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में गिरावट देखी गई।

ईरान के जवाबी हमले और बढ़ता टकराव

ईरान ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाइयों के जवाब में पड़ोसी देशों में मौजूद ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इससे पहले इजरायल ने ईरान के एक गैस क्षेत्र पर हमला किया था, जिसके बाद तेहरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।

ट्रंप का बयान और कूटनीतिक संकेत

इस बीच, डोनल्ड ट्रंप ने इजरायल की कार्रवाई पर आलोचना जताई है। इजरायल ने बाद में संकेत दिया कि वह ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने से परहेज करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर हमले को लेकर फिलहाल पांच दिनों के लिए पीछे हट रहे हैं, और तेहरान के साथ संभावित समझौते के अहम बिंदुओं पर विचार कर रहे हैं।

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