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क्या आपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई करते समय अंदर ही अंदर एक अजीब-सी घबराहट या गिल्ट महसूस किया है? 

क्या आप पर भी रहता है हमेशा 'अवेलेबल' रहने का दबाव

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि । ऑफिस से छुट्टी लेने पर अक्सर कुछ कर्मचारियों को गिल्ट महसूस होता है, भले ही वे बीमार हों या थके हुए। कॉर्पोरेट जॉब्स में छुट्टियां लेना हर कर्मचारी का सीधा अधिकार है। हालांकि फिर भी, कई लोग छुट्टी पर जाने से पहले या उस दौरान ऐसा महसूस करते हैं मानो वे कोई गलती कर रहे हों या काम से जी चुरा रहे हों। यह भावना कभी-कभी इतनी हावी हो जाती है कि लोग बीमार होने या मानसिक रूप से पूरी तरह थक जाने के बाद भी छुट्टी लेने से कतराते हैं।

इस अपराधबोध की सबसे बड़ी वजह हमारी कॉर्पोरेट कल्चर है। आज के समय में लगातार काम करने और 24 घंटे उपलब्ध रहने को ही ‘मेहनती’ होने की पहचान मान लिया गया है। देर रात तक सिस्टम पर बैठे रहना, वीकेंड पर मेल्स का रिप्लाई करना या बुखार में भी काम करते रहना- इन सबको अक्सर ‘कमिटमेंट’ का नाम दे दिया जाता है। ऐसे माहौल में जब कोई छुट्टी लेता है, तो उसे लगने लगता है कि वह अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है।

कई कर्मचारियों को यह डर सताता है कि उनके छुट्टी पर जाने से टीम के बाकी लोगों पर काम का बोझ बढ़ जाएगा या कोई बहुत जरूरी प्रोजेक्ट अटक जाएगा। यह गिल्ट उन लोगों में बहुत ज्यादा देखा जाता है जो अपने काम के प्रति अत्यधिक जिम्मेदार होते हैं या फिर उस स्थिति में जब टीम में लोग बहुत कम हों।

नौकरी जाने का डर या बॉस की नाराजगी भी इस गिल्ट को जन्म देती है। लोगों के मन में यह डर बैठा रहता है कि ज्यादा छुट्टी लेने पर कहीं उनकी मेहनत या कंपनी के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल न उठने लगें। इसके अलावा, जब हम ऑफिस में किसी सहकर्मी को बिना कोई छुट्टी लिए मशीन की तरह काम करते देखते हैं, तो तुलना की भावना जन्म लेती है और हमें लगता है कि हमें भी ऐसा ही करना चाहिए।

 

 

 

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