साइबर फ्रॉड से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है जागरूकता और सतर्कता
अधिकांश मामलों में अपराधी लोगों के लालच, डर और लापरवाही का फायदा उठाकर उन्हें शिकार बना लेते हैं

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि, इंदौर | साइबर अपराध इसलिए नहीं बढ़ रहे हैं कि अपराधी बहुत अधिक शातिर हो गए हैं। बल्कि इसकी सबसे बड़ी वजह लोगों में साइबर सुरक्षा को लेकर जानकारी का अभाव है। अधिकांश मामलों में अपराधी लोगों के लालच, डर और लापरवाही का फायदा उठाकर उन्हें ठगी का शिकार बना लेते हैं। इसलिए थोड़ी-सी सतर्कता और सही जानकारी से साइबर फ्राड के अधिकांश मामलों से बचा जा सकता है।
यह बात एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहीं। मंगलवार को हेलो नईदुनिया कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक को लेकर पाठकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में करीब 74 प्रतिशत साइबर ठगी निवेश (इनवेस्टमेंट) के नाम पर होती है। अपराधी सोशल मीडिया, मैसेज या फोन काल के जरिए कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच देते हैं। कई लोग बिना कंपनी की जांच-पड़ताल किए अपनी जमा-पूंजी निवेश कर देते हैं और बाद में ठगी का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसकी वेबसाइट, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और अन्य जरूरी जानकारी की अच्छी तरह जांच कर लें।उन्होंने डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों का भी जिक्र किया। उनके कहा कि लगभग 9 प्रतिशत साइबर ठगी इसी तरीके से होती है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करते हैं और पीड़ित को डराते हैं कि उसके या उसके परिजन का नाम किसी अपराध में सामने आया है। घबराहट में कई लोग अपराधियों के कहने पर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले शांत रहें, संबंधित परिजन या व्यक्ति से सीधे संपर्क करें और किसी भी तरह का भुगतान करने से बचें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
दंडोतिया ने कहा कि इंटरनेट का उपयोग करते समय हर व्यक्ति को सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर आए संदिग्ध संदेशों पर भरोसा न करें। कई बार ऐसे लिंक मोबाइल में वायरस या हैकिंग का कारण बन जाते हैं, जिससे बैंक खाते और निजी जानकारी अपराधियों तक पहुंच सकती है। उन्होंने अभिभावकों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। बच्चों को ऐसा मोबाइल फोन न दें, जिसमें यूपीआई या बैंकिंग ऐप सक्रिय हों, क्योंकि बच्चें गेम खेलने की चाह में अनजाने में किसी लिंक या संदेश पर क्लिक कर देते हैं, जिससे साइबर अपराधियों को फोन और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच मिल सकती है।





