
गर्मी से राहत देने वाला एयर कंडीशनर (AC) अब कई भारतीय परिवारों की जरूरत बनता जा रहा है। लेकिन एसी खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि इसे चलाने पर हर महीने बिजली का बिल कितना आएगा। यही चिंता अब कंपनियों की रणनीति भी बदल रही है। ग्राहक ऐसे एसी की तलाश में हैं, जो कमरे को ठंडा रखने के साथ बिजली की खपत भी कम करे। इसी वजह से 5-स्टार एसी, इन्वर्टर तकनीक और बिजली की खपत को समझने में मदद करने वाले स्मार्ट फीचर्स पर कंपनियों का जोर बढ़ रहा है। ग्राहक भी अब सिर्फ AC की कीमत नहीं, बल्कि उसे कई साल तक चलाने का कुल खर्च देखने लगे हैं।
2034 तक 21.59 अरब डॉलर का हो सकता है मार्केट
IMARC ग्रुप के अनुमान के मुताबिक, भारत का एयर कंडीशनिंग बाजार 2025 में 6.15 अरब डॉलर का था। 2026 में इसके बढ़कर 7.07 अरब डॉलर और 2034 तक 21.59 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ता तापमान, शहरीकरण और घरों में कूलिंग की जरूरत इस बाजार को आगे बढ़ा रहे हैं।
घरों में बिजली की खपत का बड़ा हिस्सा AC और कूलर पर
ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) और CLASP के 2024 के सर्वे से पता चलता है कि घरों में पंखे, एसी और कूलर बिजली की खपत का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। 20 राज्यों के 4,321 परिवारों पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, इन उपकरणों की कुल घरेलू बिजली खपत में हिस्सेदारी 40% थी। सर्वे में एसी अकेले कुल घरेलू बिजली खपत का 11% इस्तेमाल करते पाए गए। शहरी परिवारों में यह हिस्सा 12% था।





