महंगाई की मार, खाने-पीने और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स महंगे होंगे
कंपनियों पर कच्चे माल की लागत का दबाव

आने वाले दिनों में रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले जरूरी कंज्यूमर प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियां लगातार महंगाई के दबाव में हैं, जिससे वे अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं।
पिछले दो महीनों में 3 से 7% तक बढ़ चुके हैं दाम
रिपोर्ट में बताया गया है कि अलग-अलग कैटेगरी की कंपनियों ने पिछले एक से दो महीनों में ही अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में औसतन 3% से 7% तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसकी मुख्य वजह यह है कि कंपनियों की रॉ मटीरियल बास्केट की लागत में औसतन करीब 10% बढ़ी है।
अप्रैल की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च में यह 3.40% थी। महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.87% था।
कंपनियां कीमत बढ़ाने के साथ घटा सकती हैं वजन
इनपुट कॉस्ट में हुई इस बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए कंपनियां कीमते बढ़ाने के साथ-साथ ‘ग्रामेज कट’ यानी पैकेट का वजन घटाने का तरीका भी अपना सकती हैं।
पाम ऑयल, क्रूड और पैकेजिंग कॉस्ट बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ खास कैटेगरीज में लागत बहुत तेजी से बढ़ी है:
• पैकेजिंग मटीरियल (HDPE): शैम्पू की बोतलें, डिटर्जेंट कंटेनर और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक (HDPE) की कीमतें 56% तक बढ़ गई हैं।
• क्रूड और पाम ऑयल: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 32% तक उछल गई हैं। वहीं पाम ऑयल के दाम में भी 11% की तेजी आई है।





