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भोपालमध्यप्रदेश

भोपाल मेट्रो निर्माण पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

भोपाल के पुराने शहर में मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान सामने आई विसंगतियों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। श्रीनिवास अग्रवाल बनाम एमपी मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड प्रकरण में न्यायालय ने भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-6 के समीप चल रहे निर्माण कार्य और बैरिकेडिंग हटाने को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी थी।

मेट्रो प्रबंधन के दावों और हकीकत में अंतर

मेट्रो प्रबंधन ने शपथपत्र प्रस्तुत कर दावा किया था कि याचिकाकर्ता की भूमि के पास लगाए गए सभी बैरिकेड हटा दिए गए हैं। हालांकि याचिकाकर्ता ने दोबारा न्यायालय में अपील कर बताया कि मौके पर केवल 3.75 फीट का संकरा रास्ता छोड़ा गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने कलेक्टर भोपाल की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की।

कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा

20 फरवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बैरिकेडिंग पूरी तरह नहीं हटाई गई थी और आवाजाही के लिए बेहद कम चौड़ाई का मार्ग ही उपलब्ध था। 23 फरवरी की सुनवाई में न्यायालय ने मेट्रो के महाप्रबंधक हरिओम शर्मा को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने दी दोबारा गलती न करने की चेतावनी

सुनवाई के दौरान उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी। न्यायालय ने माफी स्वीकार करते हुए शपथपत्र वापस लेने की अनुमति दी, लेकिन भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति होने पर विधि अनुसार अभियोजन की कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

 

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