
राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि, अंबिकापुर | कलेक्टर का आदेश फाइलों में कैद और सांड सड़कों पर आजाद… अंबिकापुर में शासन-प्रशासन की लापरवाही ने एक महिला की जान ले ली। शुक्रवार सुबह भाथूपारा निवासी 55 वर्षीय महिला बीबी बाई घर के बाहर हैंडपंप पर पानी भर रही थी, तभी एक सांड ने पीछे से धक्का मार दिया। महिला के गिरते ही सांड उसके ऊपर से गुजर गया। महिला ने भागने की कोशिश की तो सांड ने फिर धक्का दे दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर शनिवार को उसे रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया, जहां रविवार सुबह उसकी मौत हो गई।
शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों तक बेसहारा मवेशियों का कब्जा है। दिन-रात सड़कों पर बैठे मवेशियों के झुंड से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। रात के समय पक्की सड़कों पर ही ये झुंड बैठना पसंद करते हैं। सड़क पर बैठे मवेशियों से हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शहर में कई सांड भी स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। आपस में लड़ते-झगड़ते सांडों के कारण जाम लगता है। कई बार इनकी लड़ाई की चपेट में आकर राहगीर जख्मी हो चुके हैं और सड़क किनारे खड़े वाहन भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।सरगुजा पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन पर तत्कालीन कलेक्टर ने कुछ महीने पहले ही आदेश जारी किया था। आदेश में साफ कहा गया था कि मवेशियों को खुला छोड़ने वालों पर वैधानिक कार्रवाई होगी। इसके बावजूद स्थिति जस की तस है। शहर में दर्जनों पशुपालक आज भी मवेशियों को खुला छोड़ रहे हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन की निष्क्रियता से कलेक्टर का आदेश कागजी साबित हो रहा है।
महापौर मंजूषा भगत ने माना कि शहर में विचरण करने वाले मवेशी बड़ी समस्या हैं। उन्होंने कहा, “इसके कारण सिर्फ शहर की व्यवस्था नहीं, बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी प्रभावित है।” महापौर ने बताया कि नगर निगम आयुक्त से इस विषय पर चर्चा हुई है। स्वच्छंद विचरण करने वाले सांडों को पकड़कर सुरक्षित तरीके से रखने का निर्देश दिया गया है।





