
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्यभर के सरकारी स्कूलों में कमरों की लगातार खराब स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि पहले स्वतः संज्ञान लेते हुए दिए गए निर्देशों के बावजूद कोई संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है। नाराज डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ पूरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 23 मार्च, 2026 की तिथि तय कर दी है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 24 फरवरी 2026 को जनवरी 2025 की एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाल ही में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें इस बात की जानकारी दी गई थी, विद्यालयों में लड़कियों के शौचालयों की भयावह कमी और दयनीय स्थिति। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के पांच हजार से अधिक विद्यालयों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि आठ हजार से अधिक विद्यालयों में शौचालय बेहद खराब स्थिति में हैं।
डिवीजन बेंच ने गौर किया कि ऐसी स्थितियों से छात्रों और शिक्षकों दोनों को परेशानी हो रही है, मूत्र संक्रमण की रिपोर्ट सामने आ रही हैं और छात्राओं में असुविधा बढ़ रही है। अकेले बिलासपुर जिले में ही 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय संबंधी गंभीर समस्याएं बताई जा रही हैं, और 200 से अधिक स्कूलों में शौचालय अनुपयोगी हैं। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपस्थिति अनुपस्थिति और स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि का कारण बन सकती है, और इसे एक प्रणालीगत विफलता बताया।





