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हिरई माता के दरबार से जुड़ी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था, मां के नाम से ही मिली हीरापुर को पहचान

11वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का निर्माण, नि:संतान दंपती संतान की कामना से आते हैं

बड़वाह। नवरात्रि के नौ दिन… मां की आराधना, आस्था और विश्वास का उत्सव। इन दिनों निमाड़ के प्राचीन देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसा ही आस्था का प्रमुख केंद्र सनावद से करीब 15 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में बसे ग्राम हीरापुर में स्थित हिरई माता का प्राचीन मंदिर है। मां के नाम से ही गांव को पहचान मिली है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता रानी पूरी करती हैं। विशेषकर संतान की कामना लेकर आने वाले नि:संतान दंपतियों की यहां गहरी आस्था है। नवरात्रि में स्थानीय ग्रामीणों के साथ दूरदराज से श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।

तालाब के किनारे स्थित हिरई माता मंदिर का वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। मंदिर के पीछे फैला तालाब सागर जैसा दिखाई देता है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ाता है। नवरात्रि के दौरान यहां भक्तिमय माहौल रहता है। श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। निमाड़ क्षेत्र के पंवार और राजपूत समाज सहित विभिन्न समाजों के लोग हिरई माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।

11वीं शताब्दी से जुड़ा है इतिहास: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, क्षत्रिय पंवार वंशीय शासकों ने 11वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण करवाया था। गांव को करीब 800 वर्ष पुराना बताया जाता है। वर्तमान में हीरापुर में लगभग 800 घर हैं, जहां विभिन्न समाजों के लोग निवास करते हैं। मंदिर परिसर में आज भी प्राचीन स्थापत्य और ऐतिहासिक अवशेष देखे जा सकते हैं। गर्भगृह में हिरई माता के साथ भगवान शिव का मंदिर भी है। परिसर में भगवान गणेश, विष्णु, दुर्गा, शिव, राम-सीता और हनुमान सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पाषाण प्रतिमाएं स्थापित हैं। स्थानीय मान्यताओं में यहां चौंसठ योगिनियों का वास भी बताया जाता है।

थम गई रौनक: ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1978 के पहले हीरापुर में मेला लगता था। समय के साथ बाजार की कमी, बदहाल सड़क और आवागमन के साधनों के अभाव में मेले का आयोजन बंद हो गया। क्षेत्रवासियों की इच्छा है कि मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर मेले की परंपरा फिर शुरू हो, ताकि प्राचीन धरोहर की पहचान दूर-दूर तक पहुंचे।

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