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भोपालमध्यप्रदेश

150 यूनिट बिजली खपत तक सरकार देती ₹606 अनुदान, महज 1 यूनिट बढ़ते ही अनुदान शून्य होकर बिल तीन गुना बढ़ता है

खपत नियंत्रित रखना उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि, भोपाल। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल के आंकड़े बताते हैं कि बिजली खपत में केवल एक यूनिट की बढ़ोतरी कई बार पूरे बिल पर बड़ा असर डाल देती है। इसका सबसे बड़ा कारण 150 यूनिट तक मिलने वाला मध्य प्रदेश शासन का अनुदान है, जो 151 यूनिट पर समाप्त हो जाता है। यही वजह है कि 150 यूनिट तक अपेक्षाकृत कम बिल देने वाले उपभोक्ता 151 यूनिट पहुंचते ही सीधे सामान्य बिल श्रेणी में आ जाते हैं। टेबल के अनुसार सौ यूनिट बिजली खपत पर ऊर्जा शुल्क 519 रुपये, स्थायी प्रभार 134 रुपये, विद्युत शुल्क 47 रुपये और अन्य अधिभार जोड़कर मासिक बिल 706 रुपये बनता है। इसमें शासन का 606 रुपये का अनुदान मिलने के बाद उपभोक्ता को केवल सौ रुपये का अंतिम बिल देना पड़ता है।

150 यूनिट तक मासिक बिल 1,026 रुपये बनता है, लेकिन 606 रुपये के शासन अनुदान के कारण अंतिम देय राशि 420 रुपये रह जाती है। वहीं जैसे ही खपत 151 यूनिट होती है, ऊर्जा शुल्क बढ़कर 809.55 रुपये, स्थायी प्रभार 330 रुपये और विद्युत शुल्क 82 रुपये हो जाता है। कुल मासिक बिल 1,231 रुपये बनता है, लेकिन इस स्तर पर शासन अनुदान शून्य हो जाता है। परिणामस्वरूप उपभोक्ता को पूरे 1,231 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। वहीं दो सौ यूनिट पर ऊर्जा शुल्क 1,155 रुपये, स्थायी प्रभार 420 रुपये और विद्युत शुल्क 123 रुपये पहुंच जाता है। इससे मासिक बिल 1,711 रुपये बनता है। 250 यूनिट पर अंतिम बिल 2,199 रुपये और तीन सौ यूनिट पर 2,689 रुपये तक पहुंच जाता है। ईंधन व विद्युत क्रय समायोजन अधिभार भी खपत बढ़ने के साथ 5.76 रुपये से बढ़कर 20.65 रुपये तक पहुंच जाता है

150 यूनिट तक बिजली खपत नियंत्रित रखने पर शासन अनुदान का सीधा लाभ उपभोक्ताओं मिलता है। लेकिन 151 यूनिट पर पहुंचते ही यह राहत समाप्त हो जाती है और ऊर्जा शुल्क, स्थायी प्रभार, विद्युत शुल्क सहित सभी मदों का पूरा भार उपभोक्ताओं पर आ जाता है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मासिक बिजली खपत पर निगरानी रखना आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो सकता है।

 

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