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खत्म हुआ शिवभक्तों का इंतजार! सावन में इस दिन से शुरू होगी कांवड़ यात्रा

जानें कांवड़ यात्रा की शुरुआत की तारीख और इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम

कांवड़ यात्रा शिव भक्तों द्वारा हर साल सावन के महीने में की जाने वाली एक शुभ तीर्थयात्रा है, जिससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। धर्म डेस्क के अनुसार, कांवड़ यात्रा सावन यानी भगवान शिव के प्रिय महीने में की जाती है। माना जाता है कि इस यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी।

इसमें भक्त पवित्र स्थानों से गंगाजल भरकर लाते हैं और शिवालयों में अभिषेक करते हैं। यह एक कठिन यात्रा मानी जाती है, जिसके दौरान कठोर नियमों का भी पालन करना होता है, तभी यह यात्रा सफल मानी जाती है। चलिए जानते हैं कांवड़ यात्रा की शुरुआत की तारीख और इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम।

क्या  होती है कांवड़ यात्रा?

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों द्वारा हर साल सावन में की जाने वाली एक पवित्र जल यात्रा है। इन भक्तों को कांवड़िए कहा जाता है। शिव भक्त गंगातट से कलश में गंगाजल को भरकर उसको अपनी कांवड़ से बांधते हैं और कंधों पर लटकाते हैं, जिसे कांवड़ कहा जाता है। इस दौरान भक्त हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री या सुल्तानगंज जैसे तीर्थों से पवित्र गंगाजल लाते हैं और अपने स्थानीय शिवालयों में महादेव का अभिषेक करते हैं।

साल 2026 में कब होगी यात्रा की शुरुआत

सावन माह शुरू होने के साथ ही कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो जाती है, जिसका समापन ‘सावन शिवरात्रि’ के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ होता है। साल 2026 में सावन की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार के दिन से हो रही है। ऐसे में कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत इसी दिन से होगी। वहीं सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को है, जिस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर कांवड़ यात्रा का समापन किया जाएगा।

 

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