किन विशेष परिस्थितियों में दोपहर में हो सकती है पूजा? आइए जानते हैं…
कहा जाता है कि यह देवी-देवताओं के आराम करने का समय है

राष्ट्र आजकल प्रतिनिधि | शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों और अनुष्ठानों के लिए दोपहर के समय की छूट दी गई है सुबह से चल रहा अनुष्ठान: यदि आपके घर में कोई मांगलिक कार्य या बड़ा अनुष्ठान सुबह से ही चल रहा है और वह दोपहर या शाम तक जारी रहता है, तो उसमें कोई दोष नहीं होता।विशेष मुहूर्त नवरात्रि में घटस्थापना या कुछ विशेष व्रतों का शुभ मुहूर्त दोपहर में पड़ता है। उदाहरण के लिए, सुबह का मुहूर्त छूटने पर दोपहर का अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है।
दोष निवारण पूजा: कालसर्प दोष या राहुकाल से जुड़ी विशेष शांति पूजा यदि दोपहर के समय तय की गई हो, तो वह बाध्यता के तहत की जा सकती है। मानसिक पूजा और नाम जप: दोपहर में आप भगवान की मूर्ति या मंदिर को स्पर्श किए बिना मानसिक रूप से अपने इष्टदेव का ध्यान, नाम जप या दूर से प्रणाम कर सकते हैं।ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:00 बजे से 05:30 बजे): सूर्योदय से लगभग डेढ़ से दो घंटे पहले का यह समय पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक होती है और मन एकाग्र रहता है।
निशिता काल (मध्य रात्रि): देर रात या मध्य रात्रि का यह मुहूर्त विशेष मंत्र सिद्धि, तंत्र साधना और कालरात्रि/जन्माष्टमी जैसी विशेष रात्रियों की पूजा के लिए प्रयोग किया जाता है।





