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शरीर पर नील और जोड़ों में दर्द हो रहा है..तो हो सकती है यह गंभीर बीमारी..

अगर बिना किसी स्पष्ट चोट के शरीर पर बार-बार नील पड़ रहे हैं या हल्की चोट पर ही जोड़ों में सूजन और दर्द होने लगता है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति ‘हीमोफीलिया’ (Hemophilia symptoms) जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। आपको बता दें कि हर साल दुनियाभर में 17 अप्रैल का दिन World Hemophilia Day के तौर पर मनाया जाता है।

हीमोफीलिया क्या है

डॉ. उर्मी शेठ (कंसल्टेंट क्लिनिकल हेमेटोलॉजिस्ट, इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, पुणे) के अनुसार हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) सही तरीके से नहीं बन पाता। इसका मुख्य कारण खून में क्लॉटिंग फैक्टर्स की कमी होना है।

आमतौर पर लोग इसे सिर्फ कट लगने पर खून न रुकने की समस्या समझते हैं, लेकिन इसके लक्षण इससे कहीं ज्यादा व्यापक होते हैं।

 

प्रमुख लक्षण

हीमोफीलिया के शुरुआती लक्षणों में बिना वजह बार-बार नील पड़ना, जोड़ों जैसे घुटनों, टखनों और कोहनियों में दर्द व सूजन शामिल हैं। इसके अलावा दांतों के इलाज के बाद लंबे समय तक खून बहना और बार-बार नकसीर (नाक से खून) आना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

जोड़ों के लिए कितना खतरनाक

डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी में कई बार अंदरूनी रूप से जोड़ों में खून जमा होने लगता है। शुरुआत में यह हल्के दर्द, जकड़न और गर्माहट के रूप में दिखता है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थायी नुकसान और चलने-फिरने में परेशानी का कारण बन सकता है।

क्या हर नील ही हीमोफीलिया है?

विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार नील पड़ना हीमोफीलिया नहीं होता। इसके पीछे प्लेटलेट्स की समस्या, विटामिन की कमी, लिवर की बीमारी, वॉन विलेब्रांड रोग या दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

सही पहचान कैसे होती है

इस बीमारी की पुष्टि के लिए मेडिकल और फैमिली हिस्ट्री, शारीरिक जांच और ब्लड टेस्ट जरूरी होता है। इसमें कोएगुलेशन प्रोफाइल और क्लॉटिंग फैक्टर की जांच से फैक्टर VIII या IX की कमी का पता लगाया जाता है।

समय पर इलाज जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और इलाज से हीमोफीलिया को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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